यूपी को स्टार्टअप का गढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार ने स्टार्टअप नीति-2026 में पूंजी जुटाने से लेकर उत्पाद तैयार करने और बाजार तक पहुंच बनाने के लिए अहम बदलाव किए हैं। नई नीति में डीप-टेक स्टार्टअप को सामान्य प्रोत्साहन के मुकाबले 50 प्रतिशत अतिरिक्त सहायता देने के साथ एक पात्र स्टार्टअप में सरकार की ओर से 40 करोड़ रुपये तक निवेश का प्रावधान किया गया है। इससे लंबे समय में परिणाम देने वाले तकनीकी स्टार्टअप को शुरुआती दौर के बाद भी पूंजी की कमी नहीं होगी।
पेशेंस कैपिटल के मामले में नीति का व्यापक प्रावधान 100 करोड़ रुपये तक का है। सरकार की ओर से एक पात्र स्टार्टअप में 40 करोड़ रुपये तक निवेश के फैसले से लंबी अवधि में परिणाम देने वाले डीप-टेक प्रोजेक्ट को पूंजी की कमी से जूझना नहीं पड़ेगा। एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम चार स्टार्टअप्स को यह सहायता दी जाएगी।
महिला, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से जुड़े स्टार्टअप के साथ ही पूर्वांचल और बुंदेलखंड में काम करने वाले स्टार्टअप को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा। कृषि तकनीक, ग्रामीण प्रभाव, चक्रीय अर्थव्यवस्था, अपशिष्ट प्रबंधन, स्थिरता, नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों को भी प्राथमिकता दी गई है। इस पर अतिरिक्त 50 प्रतिशत प्रोत्साहन मिलेगा। नीति के तहत 1000 करोड़ रुपये के फंड ऑफ फंड्स और 400 करोड़ रुपये के स्टार्टअप कॉर्पस फंड का प्रावधान किया गया है।