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योगी सरकार बंद कर सकती है आवास, स्वरोजगार जैसी कई योजनाएं, जानें वजह

Mon, 01 May 2017 11:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, महेंद्र तिवारी
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याेगी अादित्यनाथ, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्त विभाग के प्रजेंटेशन के दौरान केंद्र के समानांतर चल रहीं उन योजनाओं को चिह्नित कर बंद करने पर विचार करने को कहा था, जिससे राज्य के संसाधन पर अनावश्यक बोझ पड़ रहा है। 
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सूबे का वित्त महकमा इस ओर तेजी से काम कर रहा है और उसने एक दर्जन से अधिक ऐसी योजनाएं चिह्नित की हैं। विभाग ने केंद्रीय योजनाओं के समानांतर सिर्फ सियासी नजरिए से शुरू की गईं या मौजूदा परिस्थितियों में व्यावहारिक नहीं रह गईं योजनाओं की पहचान की है। 

2017-18 के आम बजट को अंतिम रूप देने के पहले इनके भविष्य का फैसला हो जाएगा। इनमें कई योजनाओं का खत्म किया जाना तय माना जा रहा है। मसलन, केंद्र सरकार की मदद से मिड डे मील योजना चल रही है। 
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पिछली सरकार ने इसके समानांतर स्कूली बच्चों के लिए फल वितरण की नई स्कीम शुरू कर दी। दूर-दराज के ज्यादातर क्षेत्रों में स्थित स्कूलों तक फल उपलब्धता का कोई मैकेनिज्म न होने के बावजूद यह योजना शुरू कर दी गई। करीब 200 करोड़ की इस योजना पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। 

इसी तरह, केंद्र सरकार महिलाओं व बच्चों के लिए पुष्टाहार योजना चलाती है। करीब 3000 करोड़ रुपये की इस योजना के समानांतर प्रदेश सरकार ने गर्भवती महिलाओं को दोपहर का खाना देने के लिए 400 करोड़ व अति कुपोषित बच्चों के लिए दोपहर का खाना व फल देने के लिए 125 करोड़ रुपये की नई स्कीम शुरू कर दी। 

अंदाजा लगा सकते हैं 3000 करोड़ रुपये के खर्च वाली योजना के समानांतर करीब 525 करोड़ रुपये योजना वाली स्कीम क्या असर दिखाएगी। यह कार्यक्रम भी सवालों में रहता आया है। 

बंद हो सकती हैं ये भी योजनाएं

मंत्र‌िमंडल के साथ योगी (फाइल फोटो)
केंद्र सरकार 2022 तक सभी के लिए आवास का लक्ष्य लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण व शहरी चला रही है। प्रदेश सरकार ने अपने बजट से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ‘लोहिया आवास’ और शहरी क्षेत्रों के लिए ‘आसरा’ योजना शुरू कर दी थी। 

ग्रामीण सड़कों के लिए केंद्र की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना चलती है। प्रदेश का लोक निर्माण, गन्ना विभाग व जिला पंचायतें इसी काम में बड़ा बजट खर्च करती हैं। सड़कों के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण के लिए केंद्रीय सड़क निधि से सहायता मिलती है। प्रदेश में राज्य सड़क निधि से भी यही काम होता है।

इसी तरह केंद्र सरकार राष्ट्रीय आजीविका मिशन ग्रामीण व शहरी का संचालन करती है। इसमें रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। प्रदेश सरकार इसी काम के लिए मुख्यमंत्री रोजगार योजना, विशेष रोजगार योजना सहित कई योजनाएं चलाती है। 

केंद्र सरकार ने बेरोजगारों को स्वरोजगार के लिए मुद्रा योजना शुरू की। राज्य सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग इसी तरह की समाजवादी युवा स्वरोजगार योजना व खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना चला रहा है। 

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के समानांतर राज्य पेयजल योजना भी चल रही है। उद्यान विभाग में भी इस तरह की योजनाएं हैं। जानकार बताते हैं कि वित्त वर्ष 2017-18 के बजट में विभागवार चर्चा के बाद यह तय हो सकेगा कि केंद्र के समानांतर चल रही किन-किन योजनाओं को खत्म किया जा सकता है या कौन सी योजना किस रूप में चलाई जा सकती है। वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने बजट के लिए विभागवार चर्चा शुरू कर दी है।

अब 108 के लिए केंद्र से फिर मांगेंगे सहायता

डेमो प‌िक - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत केंद्र की सहायता से 108 एंबुलेंस चलती थी। सपा सरकार ने समाजवादी नाम दिया तो केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार ने सहायता बंद कर दी। अड़ियल रुख पर कायम प्रदेश सरकार ने इस एंबुलेंस को अपने बजट से चलाना शुरू कर दिया। अब नई सरकार ने एंबुलेंस से समाजवादी शब्द हटा दिया है और केंद्र से इसके लिए सहायता फिर से शुरू करने का आग्रह करने की तैयारी कर रही है।
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पेंशन योजना पर होना है अहम फैसला
केंद्र सरकार राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम चलाती है। इसमें केंद्र सरकार वृद्धों, विधवाओं व दिव्यांगों को 200 रुपये प्रतिमाह पेंशन देती है। प्रदेश सरकार इसमें अपने हिस्से से कुछ राशि जोड़कर भुगतान कर रही है। 

लेकिन राज्य सरकार ने इसके समानांतर समाजवादी पेंशन नाम से एक अलग स्कीम शुरू कर दी। 3,444 करोड़ की इस स्कीम की नई सरकार समीक्षा करवा रही है। 

नई सरकार को निर्णय करना है कि पिछली सरकार की भारी भरकम बजट वाली इस पेंशन स्कीम का क्या होगा? उसने लोक कल्याण संकल्प-पत्र में वृद्धों व महिलाओं की पेंशन बढ़ाकर 1000 रुपये करने का वादा किया है। 

सपा शासन में बसपा राज की कई योजनाएं हुई थीं खत्म

अखिलेश यादव - फोटो : SELF
पिछली सरकार अपने बजट से एक्सप्रेस-वे व फोर लेन सड़कों के निर्माण पर बड़ी रकम खर्च आती आई है। कर्जमाफी के बोझ तले दबी नई सरकार इस काम में केंद्र सरकार से अधिकाधिक मदद लेने की योजना बना रही है। 

इसमें पांच हजार किमी. सड़कों को राज्य सरकार राष्ट्रीय राजमार्ग में बदलवाने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा केंद्रीय राजमार्ग मंत्रालय से सूबे में कई एक्सप्रेस-वे बनाने की भी पैरवी की जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य सरकार के खजाने का बोझ काफी कम होगा।

नई सरकार आने के बाद पिछली सरकार के  समय शुरू की गई योजनाओं को बंद करने या बदले स्वरूप में चलाया जाना कोई नई बात नहीं है। 

पिछली सपा सरकार ने सत्ता संभालने के बाद अपनी पूर्ववर्ती बसपा सरकार के समय से चल रही तमाम योजनाओं को या तो बंद कर दिया था या नाम बदलकर शुरू किया था। 

बसपा राज में डॉ. अंबेडकर ग्राम सभा विकास योजना, अंबेडकर संपर्क मार्ग योजना, अंबेडकर रोजगार योजना, डॉ. भीमराव अंबेडकर नलकूप योजना, सर्वजन महामाया आवास योजना व कांशीरामजी शहरी गरीब आवास योजना सहित तमाम योजनाएं चल रही थीं। सपा सरकार ने इस तरह की तमाम योजनाओं को बंद कर नए नाम व नए रूप में शुरू की थीं।
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कर्जमाफी और सातवें वेतन के भुगतान से बजट संतुलन बड़ी चुनौती

सीएम योगी आद‌ित्यनाथ
प्रदेश सरकार पर करीब 36,000 करोड़ रुपये की कर्जमाफी का बोझ आना है। इसमें एक तिहाई का खर्च 2017-18 के बजट से उठाने की योजना है। इसके अलावा सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के हिसाब से वेतन, पेंशन व एरियर की एक किस्त का भुगताना होना है। 

इस पर करीब 30 हजार करोड़ का खर्च आएगा। राज्य सरकार को अपने बजट से इस अतिरिक्त खर्च को वहन करने के लिए ज्यादा माथापच्ची करनी पड़ रही है। बजट तैयारी से जुड़े अफसरों को उम्मीद है कि सरकार इस चुनौती से पार पा लेगी।
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