68,500 सहायक शिक्षकों की भर्ती में भारी गड़बड़ियों को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है। सीबीआई को 6 माह में जांच पूरी करनी होगी। परीक्षा में धांधलियों, बार कोड के बावजूद उत्तर पुस्तिकाएं बदलने और सही जवाबों पर भी शून्य अंक देने के खिलाफ कोर्ट में सोनिका देवी की याचिका समेत कुल 41 याचिकाएं दायर की गई हैं।
जस्टिस इरशाद अली ने सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करते हुए कहा कि परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियां तीन मूल अधिकारों अभिव्यक्ति, जीवन और समानता का हनन करती हैं। बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों के मामले सामने आए, जिन्हें 65 नंबर दिए गए। उनके 3-4 प्रश्नों के जवाब सही होते हुए भी शून्य अंक दिए गए। जिससे वे चयन से बाहर हो गए। सोनिका देवी का तो जानबूझकर चयन नहीं किया गया। इन मामलों को न्यायिक जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता। मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।
सपा शासन में सहायक शिक्षकों के 12,460 पदों पर की गई भर्तियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रद्द कर दिया है। इस मामले में दायर 32 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसे अभ्यर्थियों को दूसरे जिलों में काउंसलिंग के लिए प्रथम वरीयता पर रखना कानून बिगाड़ने के बराबर है, जिनके अपने जिले में भर्तियां शून्य थीं।
इसके अलावा न्यायाधीश ने यूपी बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी आदेश को इस आधार पर खारिज कर दिया कि वे सभी अक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए थे। जस्टिस इरशाद अली ने कहा कि सरकार इन पदों के लिए तीन महीने में फिर से भर्ती प्रक्रिया पूरी करे।