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शिक्षक भर्ती पर हाईकोर्ट के फैसले को खंडपीठ में चुनौती देगी योगी सरकार, ये है आगे का रास्ता

Fri, 02 Nov 2018 11:41 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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68,500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में सीबीआई जांच और 12460 सहायक अध्यापक भर्ती निरस्त करने के उच्च न्यायालय की एकल पीठ के निर्णय के खिलाफ सरकार खंडपीठ में अपील दायर करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य की सुरक्षा करेगी।

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बृहस्पतिवार को एकलपीठ का निर्णय आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर मुख्य सचिव प्रभात कुमार सहित विभाग के अधिकारियों को बुलाया।

अपर मुख्य सचिव प्रभात कुमार ने मुख्यमंत्री को उच्च न्यायालय के फैसले से अवगत कराते हुए विभाग की तरफ से स्थिति स्पष्ट की। मुख्यमंत्री ने दोनों मामलों में खंडपीठ में अपील करने के निर्देश दिए।
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उन्होंने कहा कि चयनित अभ्यर्थी नौकरी कर रहे हैं। चयनित सहायक अध्यापकों और उनके परिवार के भविष्य की सुरक्षा सरकार करेगी। प्रभात कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री ने दोनों मामलों में खंडपीठ में अपील करने के निर्देश दिए हैं, जल्द अपील दायर कर एकल पीठ के आदेश को निरस्त करने का आग्रह किया जाएगा।

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68,500 सहायक शिक्षकों की भर्ती की जांच सीबीआई को

68,500 सहायक शिक्षकों की भर्ती में भारी गड़बड़ियों को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है। सीबीआई को 6 माह में जांच पूरी करनी होगी। परीक्षा में धांधलियों, बार कोड के बावजूद उत्तर पुस्तिकाएं बदलने और सही जवाबों पर भी शून्य अंक देने के खिलाफ कोर्ट में सोनिका देवी की याचिका समेत कुल 41 याचिकाएं दायर की गई हैं।

जस्टिस इरशाद अली ने सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करते हुए कहा कि परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियां तीन मूल अधिकारों अभिव्यक्ति, जीवन और समानता का हनन करती हैं। बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों के मामले सामने आए, जिन्हें 65 नंबर दिए गए। उनके 3-4 प्रश्नों के जवाब सही होते हुए भी शून्य अंक दिए गए। जिससे वे चयन से बाहर हो गए। सोनिका देवी का तो जानबूझकर चयन नहीं किया गया। इन मामलों को न्यायिक जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता। मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।
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12,460 पदों पर की गई भर्तियां हुई रद्द

सपा शासन में सहायक शिक्षकों के 12,460 पदों पर की गई भर्तियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रद्द कर दिया है। इस मामले में दायर 32 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसे अभ्यर्थियों को दूसरे जिलों में काउंसलिंग के लिए प्रथम वरीयता पर रखना कानून बिगाड़ने के बराबर है, जिनके अपने जिले में भर्तियां शून्य थीं।

इसके अलावा न्यायाधीश ने यूपी बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी आदेश को इस आधार पर खारिज कर दिया कि वे सभी अक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए थे। जस्टिस इरशाद अली ने कहा कि सरकार इन पदों के लिए तीन महीने में फिर से भर्ती प्रक्रिया पूरी करे।
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