उपचुनाव में आमतौर पर किसी भी राजनीतिक दल का राष्ट्रीय नेतृत्व प्रचार में बहुत सक्रिय भूमिका नहीं निभाता। ज्यादातर प्रदेश के नेताओं के कंधों पर ही यह दायित्व रहता है। फिर इस समय हरियाणा व महाराष्ट्र के चुनाव की चुनौती से केंद्रीय नेतृत्व चाहे भी तो उपचुनाव के लिए वक्त नहीं निकाल सकता। उसके लिए दो राज्यों के आम चुनाव ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
ऐसे में प्रदेश में सारा दारोमदार सीएम योगी के कंधों पर है। योगी के लिए भी उपचुनाव इसलिए अहम हैं क्योंकि उन्हें भी इस बात का एहसास है कि नतीजे कहीं न कहीं सीधे उन्हीं की साख से जुड़ेंगे। इसीलिए वे इन चुनाव को लेकर कोई ढिलाई नहीं करना चाहते।
ध्यान रहे कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के कंधों पर महाराष्ट्र की जिम्मेदारी डाल रखी है। ऐसे में उनका भी ज्यादा वक्त प्रदेश से बाहर ही बीत रहा है। इस नाते भी योगी के कंधों पर ज्यादा जिम्मेदारी है।