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अपने जीवन को पैसा कमाने की फैक्ट्री न बनने दें डॉक्टर, दीक्षांत समारोह में सीएम योगी

Sun, 17 Sep 2017 12:37 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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पीजीआई के दीक्षांत समारोह में सीएम योगी व राज्यपाल राम नाईक - फोटो : amar ujala
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चिकित्सक समस्या के उपचार के बजाय बीमारी के मूल में जाएं। आज बीमारियों पर शोध की सबसे बड़ी जरूरत है। शोध के वृहद केंद्र के रूप में एसजीपीजीआई को विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि मैं वादा करता हूं कि एसजीपीजीआई के शोध कार्यों में धन की कमी नहीं आने दी जाएगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में फैली जेई-एईएस बीमारी पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यदि चिकित्सकों ने ईमानदारी से शोध के कार्य किए होते तो इस बीमारी से निजात मिल चुकी होती।
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मुख्यमंत्री शनिवार को एसजीपीजीआई के 22वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि आप अपना जीवन मशीन बनाकर मत रख देना। अपने जीनव को पैसा कमाने की फैक्ट्री मत बनने देना। डॉक्टर का पेशा सबसे सम्मान का पेशा है। लेकिन डॉक्टर आज डिग्री लेकर सबसे पहले पैसा कमाना चाहते हैं। उन्हें इससे दूर रहकर मानवता की सेवा करनी चाहिए। यदि आप मानवता की सेवा करेंगे तो पैसा और सम्मान दोनों पाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीजीआई की पहचान यूपी की चिकित्सा सेवा के रीढ़ के तौर पर की जाती है। यह बात सही है कि एसजीपीजीआई की स्थापना चिकित्सा क्षेत्र के विशिष्ट शोध करने के लिए की गई थी। मैं यह भी मानता हूं यहां पर मरीजों के लोड को देखकर यहां जो सिफारिशें होती हैं उसमें शोध कार्य आसान नहीं हैं। इसके बावजूद यहां के डॉक्टरों को अपने मूल उद्देश्यों से भटकना नहीं चाहिए। उत्तर प्रदेश की सामाजिक, आर्थिक, भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए यहां की पनप रही बीमारियों के लिए शोध के विशिष्ट केन्द्र के रूप में इस संस्थान को विकसित करना होगा।
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गणेश जी के सिर जोड़ने पर चीन कर रहा है शोध

मुख्यमंत्री ने कहा कि गणेश जी के सिर कटने के बाद शिव जी ने एक हाथी के बच्चे का सिर उनके धड़ से जोड़ दिया। इस पर चीन शोध कर रहा है। हम इस शोध में भी पिछड़ रहे हैं।

हमारे शास्त्रों में यदि कोई विचार आया है तो उसके पीछे के कारणों पर हमें शोध करना चाहिए। आयुर्वेद के ग्रंथों पर भी हमें ध्यान देना चाहिए। एलोपैथिक के साथ आयुर्वेद को जोड़कर एक नई विधा विकसित की जा सकती है। इसके जरिए बीमारी का स्थाई इलाज किया जा सकता है।

चिकित्सा शिक्षा को तकनीक से होगा जोड़ना
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल बिल्डिंग खड़ा कर देने से कुछ नहीं होता है। पैसा विकास के लिए सरकार से भेजा जाता है। ऐसे में इसका रिजल्ट भी दिखना चाहिए। सरकार किसी भी संस्थान को बजट की कमी नहीं होने देगी।

चिकित्सा शिक्षा को टेक्नोलॉजी से जोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि चिकित्सक के लिए मरीज से बड़ा कोई अतिथि नहीं होता है। अतिथि वो नहीं होता जो पहचान का हो, अतिथि वो है जो बिना पहचान का हो। उन्होंने कहा कि पीजीआई को 473 करोड़ लोन दिया गया है। लोन सरकार को ही भरना है।
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अगले सत्र से डिग्री में लगेगी फोटो: राज्यपाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व राज्यपाल राम नाईक के साथ डॉक्टर्स - फोटो : amar ujala
राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि अगले सत्र से छात्र-छात्राओं को डिग्री में फोटो लगाकर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी नर्सिंग के छात्र-छात्राओं को डिग्री नहीं मिली है। इनकी परीक्षाएं विलंब से होती हैं। ऐसे में इनके लिए अलग से सप्लीमेंट्री दीक्षांत समारोह आयोजित किया जाए। इस साल की डिग्री अगले साल नहीं मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मरीजों की सेवा करना पुण्य का काम है। डॉक्टर्स को मरीजों से अच्छा व्यवहार करना चाहिए। पीजीआई की पहचान देश के उत्कृष्ट चिकित्सा संस्थान के रूप में होती है। पीजीआई के विकास के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। मेहनत व ईमानदारी से यदि आप काम करेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी।

भगवान के बराबर होती है डॉक्टरों से अपेक्षा: आशुतोष
चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा कि दीक्षांत समारोह का अर्थ दीक्षा का अंत होता है। लेकिन डॉक्टरी एक ऐसी पढ़ाई है जिसमें दीक्षा का अंत कभी नहीं होता। यह सेवा भावना का कार्य है।

उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि आपको विशेषज्ञ बनाने में उत्तर प्रदेश के बहुत बड़े तंत्र का काम है। अब समय है समाज को वापस लौटाने का। डॉक्टरों से भगवान के बराबर ही अपेक्षा होती है। इसलिए यह पेशा सबसे पवित्र है। उन्होंने कहा कि एसजीपीजीआई चिकित्सा शिक्षा के 23 संस्थानों में सबसे प्रतिष्ठित है।
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