मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हिंदू संस्कृति तलवार की नोक पर किसी के ऊपर विचार नहीं थोपती। वह विचारों के आदान-प्रदान तथा दूसरों के विचारों को सम्मान को महत्व देती है।
हिंदू धर्म में कर्म योग को ही अध्यात्म का सर्वश्रेष्ठ मार्ग माना गया है। मुख्यमंत्री ने रविवार को म्यांमार के प्रसिद्ध नगर यंगून में ‘संवाद’ कार्यक्रम में यह बात कही।
योगी ने हिंदू संस्कृति पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय दर्शन प्रतिक्रिया देने से पूर्व दूसरों की मन:स्थिति तथा विचारों को समझने पर बल देता है। किसी भी व्यक्ति के विचारों को पूरी तरह सुनने से पहले उसके विषय में कोई धारणा नहीं बनानी चाहिए।
हिंदू संस्कृति में ‘द्वंद्व’ नहीं, ‘मीमांसा’ या ‘विवेचना’ को श्रेष्ठ माना गया है। इसके चार चरण हैं। पहला श्रवण यानी ध्यानपूर्वक सुनना। दूसरा मनन यानी गहन मीमांसा, तीसरा चिंतन यानी विचार करना। चौथा कीर्तन यानी अपने विचार प्रस्तुत करना है।
हिंदू संस्कृति को भगवान बुद्ध से जोड़ा
विचारों के जीवंत एवं शांतिपूर्ण आदान-प्रदान की पंरपरा हिंदू संस्कृति में हमें विरासत में मिली है। यह दुनिया में दूसरी जगह दुर्लभ है। भगवान बुद्ध भी द्वंद्व व संघर्ष टालने के प्रबंल समर्थक थे।
बौद्ध स्थलों को सहेज रही सरकार
योगी ने कहा, उप्र में भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों को बौद्ध सर्किट के जरिये जोड़ने का काम हो रहा है ताकि पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं को इन जगहों तक आने में आसानी रहे। दुर्भाग्य से नई पीढ़ी के पास अपने धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने और उनके अनुरूप अनुसरण करने का समय नहीं है। इसलिए प्रकृति को समझने की संवेदना भी कम होती जा रही है, जिसका सीधा प्रभाव हमारे पर्यावरण पर पड़ रहा है।