मुख्यमंत्री योगी ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर कहा कि जिन मारूती वैन्स, टैम्पो को रिजेक्ट कर दिया जाता है, उन्हें स्कूल में चलाया जा रहा है। रिक्शों पर बच्चे लटक कर स्कूल जाते हैं। पिछले साल कुशीनगर में हुई घटना से भी सीख नहीं ली गई है। स्कूल का वाहन चलाने वाले सभी चालकों की मेडिकल जांच के साथ ही पुलिस सत्यापन कराएं।
स्कूली वाहनों का नियमित फिटनेस टेस्ट सत्र शुरू होने से पहले हो जाना चाहिए। इनके लिए जरूरी हो तो छुट्टी के दिन भी आरटीओ कार्यालय खोलें। जो भी वाहन फिटनेस पास हो उनको ही सड़क पर चलने की अनुमति दी जाए। कंडम बसें और डग्गामार वाहनों को स्क्रैप कर दिया जाए। अन्य प्रदेशों से आने और जाने वाली बिना परमिट की बसों को प्रदेश से गुजरने की अनुमति न दें। जो भी कानून का उल्लंघन करे उससे पूरी सख्ती से निपटें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिलाधिकारी अपने जिलों में सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी विभागों के अधिकारियों के साथ हर माह बैठक करें। जिसकी समीक्षा हर महीने मुख्य सचिव करें। हर तीन महीने पर सड़क सुरक्षा को लेकर सूचना विभाग, परिवहन विभाग और यातायात विभाग व्यापक अभियान चलाए। उन्होंने कहा कि रम्बल स्ट्रिप हर 15 किमी. पर होना चाहिए।
हाइवे पेट्रोलिंग वाहन, डायल 100 और एम्बुलेंस के कर्मचारियों को सही ढंग से प्रशिक्षण दिया जाए। ओवर स्पीड को रोकने की व्यवस्था की जाए। अगस्त के पहले सप्ताह में फिर से इस बात की समीक्षा की जाएगी।
बैठक में मुख्यमंत्री के साथ डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य व डॉ. दिनेश शर्मा, चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टण्डन, औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना, परिवहन राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार स्वतंत्र देव सिंह, मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पाण्डेय एवं सम्बंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।