लखनऊ। योग आचार्य ओम नारायण अवस्थी के मुताबिक, पार्किंसन रोग में योग उपयोगी साबित हो सकता है। इसलिए पार्किंसन रोगियों को योग का अभ्यास करना चाहिए। वह शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में पार्किंसन पर हुए जागरूकता कार्यक्रम में बोल रहे थे।
न्यूरोलाॅजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. दिनकर कुलश्रेष्ठ ने बताया कि पार्किंसन रोग तंत्रिका संबंधी विकार है। इसकी वजह से मस्तिष्क के कुछ हिस्से प्रभावित होते हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति में कंपकंपी के लक्षण नजर आते हैं। इसका स्थायी उपचार नहीं है। दवाओं से इसके लक्षण पर सिर्फ कुछ हद तक काबू पाया जा सकता है।
एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अब्दुल कवी ने बताया कि पार्किंसन का मुख्य कारण मस्तिष्क में डोपामाइन नामक रसायन की कमी है। दंत रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शैली महाजन ने कहा कि पार्किंसन रोग में रोग में दांत की सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कंपकपी की वजह से व्यक्ति अपने दांतों की सही सफाई नहीं कर पाता है। इसकी वजह से उसे कई अन्य समस्याएं हो सकती हैं। न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. पीके मौर्या ने सभी को धन्यवाद दिया।