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पढ़ें, भ्रष्टाचारी यादव सिंह पर सरकार की मेहरबानी की कहानी

Fri, 24 Jul 2015 10:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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यह कहानी है करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों में सीबीआई जांच के घेरे में आए यादव सिंह पर सरकारी मेहरबानी की। तारीख 13 जनवरी, 2012। सिर्फ नौ दिन में निर्माण कंपनियों को 954 करोड़ रुपये जारी करने पर यादव सिंह पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया।
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जांच के दौरान ही 22 अक्तूबर को जेएसपी कंस्ट्रक्शंस कंपनी के पार्टनर संजय जैन ने प्रदेश सरकार को जांच ट्रांसफर करने के लिए प्रार्थना पत्र दे दिया। सरकार ने इस पर त्वरित कार्रवाई की और तीन नवंबर को जांच क्राइम ब्रांच ऑफ क्रिमिनल इनवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीबी-सीआईडी) को सौंपने का आदेश जारी कर दिया।

करीब सवा साल बाद। तारीख तीन जनवरी, 2014। सीबी-सीआईडी ने जिला व सत्र न्यायाधीश गौतमबुद्धनगर के समक्ष मामले की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। इसे नोएडा के सहायक इंजीनियर आरपी सिंह ने 27 नवंबर, 2014 को बिना किसी आपत्ति के स्वीकार भी कर लिया।
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इस दिन, एक ओर जहां क्लोजर रिपोर्ट स्वीकारी जा रही थी, वहीं दूसरी ओर आयकर विभाग यादव सिंह के नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली स्थित 20 ठिकानों पर छापे मार रहा था। इस छापे में कई वित्तीय गड़बड़ियों का खुलासा हुआ। सामने आया कि 25 प्राइवेट कंपनियों को 320 प्लॉट दिए गए, सैकड़ों करोड़ का लेन-देन भी संदिग्ध है।
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इन लोगों के नाम जारी हुए प्लॉट

ये प्लॉट उसकी पत्नी कुसुम लता, बेटे सनी यादव समेत अन्य एसोसिएट रजिंदर मनूचा, राजेश मनूचा, नम्रता मनूचा, अनिल पेशवारी, मीनाक्षी पेशवारी के नाम या उनसे जुड़ी यादव सिंह ग्रुप व मेकॉन इंफ्रॉ जैसी कंपनियों के नाम पर जारी हुए।

यह घटनाक्रम बताता है कि भ्रष्ट यादव सिंह पर यूपी सरकार किस कदर मेहरबान रही। ऐसे ही पुख्ता खुलासों और सीबीआई जांच के लिए दायर याचिका के आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस श्रीनारायण शुक्ल ने सीबीआई को जांच के निर्देश दिए। इस आदेश के बाद आखिरकार सरकार को उसे निलंबित करना पड़ा।

निलंबन से पहले यादव सिंह न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी नोएडा, ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी और यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी में मुख्य इंजीनियर था। भ्रष्टाचार को अपने जीवन का हिस्सा मान चुके अफसरों के बीच ये पद मलाईदार कहे जाते हैं।
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