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‘मोदी के खिलाफ षड्यंत्र का हिस्सा बन रहे कुछ साहित्यकार’

Sun, 01 Nov 2015 11:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री कलराज मिश्र ने कहा कि देश के कुछ साहित्यकार नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ षड्यंत्र का हिस्सा बन रहे हैं। केंद्र सरकार साहित्यकारों का सम्मान करती है लेकिन साहित्य के नाम पर सियासत को सम्मान नहीं दिया जा सकता।
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केंद्र सरकार भारतीयता व भारतीय संस्कृति के मूल्यों से कोई समझौता नहीं करेगी। कलराज रविवार को यहां निरालानगर के माधव सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पत्रिका राष्ट्रधर्म के ‘पं. दीनदयाल उपाध्याय : चिंतन विशेषांक’ का लोकार्पण कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कई साहित्यकारों को सम्मानित भी किया।

कलराज ने कहा कि भारत की पहचान भारतीयता के कारण है। इसीलिए केंद्र सरकार उसी मार्ग पर चल रही है। प्रधानमंत्री मोदी विश्व को भारतीयता का एहसास दिलाने में सफल रहे हैं। कुछ लोगों को इसी से पीड़ा हो रही है।
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भाजपा का मार्ग पं. दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन पर आधारित है, जो समाज में अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को स्वावलंबी व स्वाभिमानी बनाना चाहते थे। उन्होंने कहा, ‘जो लोग पुरस्कार लौटा रहे हैं, उन्हें लगने लगा है कि पं. दीनदयाल का सपना साकार करने वाली सरकार सत्ता में बैठी है। कहीं यह अपने मकसद में कामयाब न हो जाए। इसी से ये लोग परेशान हैं।’
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पुरस्कार लौटाने वाले हमारी संस्कृति को नष्ट करना चाहते हैं

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के कुलपति डॉ. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने कहा कि देश में दो अवधारणाओं के बीच लड़ाई चल रही है। जो पुरस्कार लौटा रहे हैं वे देश को आयातित विकास के मॉडल पर आगे बढ़ाना चाहते हैं।

वहीं, दूसरी तरफ वे लोग खड़े हैं जो भारतीय संस्कृति व गौरवशाली अतीत को आधार बनाकर देश को विकसित करने के साथ ही इसे विश्वगुरु बनाना चाहते हैं। पुरस्कार लौटाने वाले भारत की संस्कृति को नष्ट करने की साजिश रच रहे हैं। वे परेशान हैं कि इस सरकार में उनकी मनमानी नहीं चलेगी।

इसीलिए यह शोर-शराबा हो रहा है। कुछ विदेशी ताकतें भी इसके पीछे हैं। पूर्व सांसद लालजी टंडन, महापौर डॉ. दिनेश शर्मा, पत्रिका के संपादक आनंद मिश्र के अलावा आनंद मोहन चौधरी व पवन पुत्र बादल ने भी विचार व्यक्त किए।

लखनऊ के नेत्रपाल समेत कई साहित्यकारों का सम्मान: समारोह में जम्मू-कश्मीर के डॉ. महाराज कृष्ण भरत, पंजाब के हर्ष कुमार हर्ष, लखनऊ के प्रो. नेत्रपाल सिंह, चंडीगढ़ के मंजीत शर्मा, महाराष्ट्र के डॉ. दिनेश प्रताप सिंह व ममता मेहता पिंकी तथा राजस्थान की भारती अंशुमन तिवारी सहित कई  साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।
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