एक ओर पर्यटन को बढ़ावा देने के दावे किए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर खर्च कम करने के लिए यात्रियों की सुविधाओं में ही कटौती की जा रही है।
फिलहाल परिवहन निगम ने पर्यटन यात्री पास की सुविधा खत्म कर दी है। विडंबना यह है कि यह निर्णय विश्व पर्यटन दिवस से ठीक एक दिन पहले गुरुवार को लिया गया।
निगम का मानना है कि पर्यटन यात्री पास को छपवाने में काफी धनराशि खर्च होती है, लेकिन उसकी अधिक बिक्री नहीं होती है।
निगम प्रबंधन के आदेश पर मुख्य प्रधान प्रबंधक (संचालन) राजेश वर्मा ने पर्यटन यात्री पास व्यवस्था को खत्म करने का सरकुलर जारी किया है।
इस सरकुलर के जरिए प्रदेश के क्षेत्रीय प्रबंधकों एवं सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों को निर्देशित किया गया है कि पर्यटक पास न जारी किए जाएं।
इस सुविधा को खत्म करने के पीछे तर्क यह दिया जाता है कि पास छपवाने पर काफी खर्च होता, पर्यटन यात्री पास की इतनी भी बिक्री नहीं होती, जिससे उनका खर्च निकल आए। इसीलिए इस व्यवस्था को खत्म कर दिया गया।
यह थी पास सुविधा
इस पर्यटन यात्री पास के तहत पर्यटक 1055 रुपये किराया चुकाकर निगम की किसी भी बस से पर्यटन स्थल तक सफर कर सकता था। इस पास की मान्यता आठ दिन तक रहती थी। निगम ने पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पर्यटन यात्री पास सुविधा शुरू की थी।