घरों तक चिट्ठी पहुंचाने वाले डाकिया लॉकडाउन के दौरान मरीजों के घर मसीहा बनकर पहुंचे। उन्होंने कोरोना जैसे संक्रमण की परवाह किए बगैर गंभीर बीमारियों से परेशान बुजुर्ग और जरूरतमंदों को समय पर दवाइयां पहुंचाई ताकि वे घर पर स्वस्थ रह सके।
अप्रैल और मई के सख्त लॉकडाउन में जब एक शहर से दूसरे शहर तक, एक जगह से दूसरी जगह जाना मुश्किल था, तब भी डाक सेवा से हजारों मरीजों तक जीवनरक्षक दवाइयां पहुंचाकर उनकी जान बचाई। विश्व डाक दिवस पर हम ऐसे ही डाकियों को सलाम करते हैं, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर दूसरों की जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभाई।
जब देश में सख्ती से लॉकडाउन का पालन किया जा रहा था। एक राज्य से दूसरे राज्य, एक शहर से दूसरे शहर जाना मुश्किल था। तब लोगों ने यहां-वहां फंसे लोगों तक डाक सेवाओं के माध्यम से दवाइयां व जरूरी सामग्री पहुंचाने के लिए डाक विभाग की सेवाएं लीं।
अनलॉक-1 की शुरुआत से पहले मार्च, अप्रैल और मई में जीपीओ से लोगों ने करीब 6 हजार पैकेट डाक से भिजवाए हैं। आंकड़े 24 मार्च से 31 मई के बीच के हैं। जीपीओ लखनऊ के चीफ पोस्ट मास्टर आरएन यादव ने गुरुवार को बताया कि लॉकडाउन के दौरान डाक विभाग ने लॉकडाउन-1 से लेकर अनलॉक-4 तक लोगों के घरों तक गंगाजल भी पहुंचाया। लोगों ने 1972 बोतलें गंगाजल लिया।
फिलेटली डिपार्टमेंट में डाक विभाग का इतिहास
डाक विभाग का इतिहास
- फोटो : अमर उजाला
जीपीओ में बने फिलेटली डिपार्टमेंट में डाक महकमे से जुड़ा भारतीय इतिहास का अहम खजाना है। साल भर यहां रोजाना करीब 200 दर्शक आते है, लेकिन इन दिनों कोरोना काल में संख्या घटी है। ब्यूरो में डाक विभाग के जारी टिकटों का इतिहास दिखता है। म्यूजियम में लखनऊ समेत भारत में जारी किए गए कई विषयों, ऐतिहासिक धरोहरों, शख्सियतों आदि पर डाक टिकटों की जानकारी मिलती है। यहां 5 हजार से अधिक टिकटों आदि का कलेक्शन किया जा सकता है।
आज से 15 अक्तूबर तक आयोजन
विश्व डाक दिवस पर 15 अक्तूबर तक डाक सप्ताह मनाया जाएगा। इस दौरान रोजाना आयोजन होंगे। 9 को वर्ल्ड पोस्ट डे, 10 को बैंकिंग डे, 12 को पीएलआई डे, 13 को फिलेटली डे, 14 को बिजनेस डवलपमेंट डे और 15 को मेल्स डे का आयोजन होगा। हर दिन विभागीय आयोजनों के अलावा प्रतियोगियों का आयोजन होगा। कई आयोजन ऑनलाइन भी होंगे।