दरअसल हमारी जीवनशैली ही कुछ ऐसी हो गई है जिससे दिन प्रतिदिन हाइपरटेंसिव (उच्च रक्तचाप) मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। केजीएमयू की ओपीडी की बात करें तो यहां भी प्रतिदिन बड़ी संख्या में हाइपरटेंशन से पीड़ित नए मरीज बढ़ रहे हैं। यह जानकारी केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डी. हिमांशु ने बृहस्पतिवार को विश्व हाइपरटेंशन दिवस की पूर्व संध्या पर दी।
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डॉ. डी. हिमांशु ने बताया कि लोग खाने में पैक्ड फूड, हाई सॉल्ट डाइट और हाई कैलेरोज डाइट का इस्तेमाल तो खूब कर रहे हैं। लेकिन इस सॉल्ट को शरीर से बाहर निकालने के लिए कोई मेहनत नहीं की जाती।
अगर नियमित रूप से पैदल चला जाए या व्यायाम किया जाए तो पसीने के जरिए यह नमक शरीर से बाहर निकल सकता है। इसी तरह एसी में बैठने से भी शरीर से पसीना नहीं निकलता। इस कारणों से खाने के जरिए लिया गया नमक शरीर से बाहर नहीं निकल पाता और यह उच्च रक्तचाप व हाइपरटेंशन को तेजी से बढ़ावा देता है।
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हर रोज 45 मिनट वॉक दूर रखेगा हाइपरटेंशन
डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को माइल्ड हापरटेंशन की शिकायत हो तो उसे बिना दवाओं के भी ठीक किया जा सकता है। डाइट में नमक कम करने के साथ अगर हर रोज 45 मिनट तक वॉक करें तो उन्हें बिना दवा व इलाज के हाइपरटेंशन से निजात मिल सकती है। उन्होंने बताया कि 45 मिनट की वॉक से 10 मिमी तक ब्लड प्रेशर कम होता है।
गर्भावस्था में हाइपरटेंशन जच्चा-बच्चा के लिए जानलेवा
झलकारीबाई महिला अस्पताल की सीएमएस स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधा वर्मा ने बताया कि गर्भावस्था में हाइपरटेंशन सबसे अधिक खतरनाक होता है। यह जच्चा-बच्चा दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलावों के कारण गर्भवती का ब्लड प्रेशर सामान्य से बढ़ जाता है, अगर महिला को पहले से ही ब्लड प्रेशर की समस्या हो तो यह हाइपरटेंशन का रूप ले लेता है। इससे गर्भपात, समय से पूर्व प्रसव, गर्भवती को एक्लेंम्शिया समेत अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं जिससे जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो सकती है। हाइपरटेंशन मैटरनल मोर्टेलिटी का दूसरा सबसे बड़ा कारण है।
गर्भावस्था में नियमित जांच जरूरी
डॉ. सुधा वर्मा ने बताया कि गर्भावस्था का पता चलते ही सबसे पहले अस्पताल जाकर पंजीकरण कराएं। साथ ही नियमित रूप से एंटीनैटल चेकअप व ब्लड प्रेशर की जांच कराते रहें, ताकि हाइपरटेंशन समेत अन्य हाईरिस्क प्रेग्नेंसी का समय से पता चले और इलाज हो सके।
उन्होंने बताया कि अगर गर्भावस्था के दौरान चेहरे व पैरों पर सूजन, अधिक थकान या उलझन, तेज सिरदर्द, घबराहट या देखने में समस्या आए तो बिना देरी डॉक्टर को दिखाएं, यह हाइपरटेंशन के लक्षण हो सकते हैं।
प्राकृतिक व योगिक चिकित्सा भी है हाइपरटेंशन के लिए कारगर
बलरामपुर अस्पताल के योग चिकित्सक डॉ. नंदलाल जिज्ञासु ने बताया कि हाइपरटेंशन एक जीवनशैली संबंधित बीमारी है। जीवनशैली में सुधार कर इस बीमारी से बचा जा सकता है। वहीं अगर किसी को यह बीमारी है तो उसे प्राकृतिक व योगिक चिकित्सा के जरिए ठीक किया जा सकता है।
मेडिटेशन, कुछ विशेष प्रणायाम व खास योगासन कर के हाइपरटेंशन से राहत मिल सकती है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा में साफ-सुथरी दोमट मिट्टी की पट्टी को 30 मिनट तक माथे पर पेट पर रखने से व 45 मिनट तक सिर से लेकर पैरों तक मिट्टी का लेप करने से शरीर की टॉक्सीसिटी निकल जाती है। इससे शरीर व मस्तिष्क ठंडा रहता है।
चंद्रभेदी व शीतली प्रणायाम देगा राहत, मिट्टी की पट्टी भी असरदार
डॉ. एनएल जिज्ञासु ने बताया कि प्रतिदिन 5 से 10 मिनट चंद्रभेदी प्रणायाम, प्रतिदिन 11-21 या 3 से 5 मिनट तक शीतली प्रणायाम, करीब 5-7 मिनट अनुलोम-विलोम प्रणायाम व 3 से 5 मिनट शीतकारी प्रणायाम स्ट्रेस लेवल को कम करते हैं, शरीर को एक्टिव करते हैं और उच्चरक्तचाप को दूर रखते हैं।
इसके अलावा सूर्य नमस्कार, उदरपवनमुक्तासन, शल्भासन, योग मुद्रासन व श्शांकासन का 4 से 6 राउंड अभ्यास भी हाइपरटेंशन को दूर रखने के लिए बेहद कारगर है।
हाइपरटेंशन के लक्षण-
सिर में तेज दर्द
थकान या उलझन होना
चिड़चिड़ापन होना
उल्टियां होना
देखने में समस्या या धुंधला दिखना
सीने में दर्द
सांस लेने में समस्या
दिल की धड़कनों में अनियमितता
यूरिन में खून आना
नाक से खून आना
हाइपरटेंशन की अनदेखी हो सकती घातक
अंधापन या आंखें खराब होना
गुर्दे खराब होने की आशंका
दिल की बीमारियों व हार्ट अटैक का खतरा
ब्रेन हेमरेज का खतरा
खून की नलियां खराब होना
लकवे की आशंका
जा सकती है याददाश्त
इनमें खतरा अधिक-
अधिक उम्र के लोग
गर्भावस्था के दौरान
जिनमें घर में अन्य सदस्यों को उच्च रक्तचाप की समस्या हो
अधिक वजन व मोटे व्यक्तियों में
शारीरिक कार्य व व्यायाम न करने वाले व्यक्तियों में
धूम्रपान करने वाले लोगों में
अधिक शराब का सेवन करने वाले लोगाें में
अधिक फैटी या अधिक नमक वाली डाइट लेने वालों में
अधिक कॉलेस्ट्रॉल वाले व्यक्तियों में
जरूरत से ज्यादा तनाव व मानसिक स्ट्रेस में रहने वाले लोगों में