मोबाइल के बढ़ते चलन और उसमें भी उम्दा कैमरे की खूबी ने 99 प्रतिशत लोगों में फोटोग्राफी की छिपी इच्छा जगा दी है।
आज हर शख्स किसी भी आब्जेक्ट को कैमरे की नजर से ही देखना चाहता है। फिर चाहें वों फोटोग्राफी कैमरा हो या मोबाइल कैमरा।
राज्य संग्रहालय में शुक्रवार से शुरू हुई दो दिवसीय फोटोग्राफी से जुड़ी रोचक जानकारियों पर आधारित कार्यशाला केपहले दिन ये बातें विशेषज्ञ फोटोग्राफर अनिल रिसाल ने कहीं।
पहले दिन एनआरएलसी फोटो विभाग के हेड अनिल रिसाल सिंह ने कैमरे तथा फोटोग्राफी से जुड़े रोचक पहलुओं पर चर्चा की। पहले दिन यहां पुराने कैमरों और फोटोग्राफी उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगी।
उन्होंने मंहगे कैमरों में प्रयोग किये जाने वाले उत्तम क्वालिटी के लेंस पर टिप्स दिये।
उन्होंने कहा कि एक अच्छे छायाकार को इस खूबी से लैस होना चाहिये कि जैसा आब्जेकट हो वैसा ही छायाचित्र भी दिखाई दे।
दूसरे सत्र में इन्दिरा गांधी सेन्टर फार आर्ट नई दिल्ली के फोटोग्राफी अधिकारी डीएनवीएस सीतारमैया, एमिटी यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रो. तूलिका साहू ने भी अपनी बातें रखीं। प्रदर्शनी-व्याख्यान शनिवार को भी होगा।