प्रदेश के पहले इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (आईएमसी) का काम पैसे की व्यवस्था न हो पाने की वजह से थम गया है। अब इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए प्रदेश के शासकीय बजट से 1250 करोड़ रुपए की मांग की गई है।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना अमृतसर-कोलकाता डेडीकेटेड फ्रे ट कॉरिडोर (एकेआईसी) के अंतर्गत माल परिवहन के लिए अलग से 1840 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाने का काम चल रहा है। खास बात यह है कि इस रेलमार्ग का आधे से अधिक (1049 किलोमीटर) हिस्सा यूपी से होकर गुजरता है।
प्रदेश सरकार ने इस रेलमार्ग के दोनों ओर औद्योगीकरण की बड़ी संभावना को देखते हुए प्रस्ताव तैयार कराया था। पहले चरण में फ्रेट कॉरिडोर पर यूपी के हिस्से में पड़ने वाले 18 नए रेलवे स्टेशनों के आस-पास 5 किलोमीटर के क्षेत्र में पढ़ने वाली भूमि को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए दिसंबर 2015 में नोटिफि केशन भी जारी कर दिया गया।
कानपुर देहात में भाऊपुर के पास इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना पर सहमति बनी। सरकार ने नोटिफ ाइड क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण आदि की कार्यवाही के लिए राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) को नोडल एजेंसी नामित किया था। लेकिन भूमि चिह्नित करने के अलावा इससे जुड़ी कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पा रही है।
प्रदेश सरकार ने हाल में लंबित प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी मांगी तो इस प्रोजेक्ट के काम की ठहराव की जानकारी सामने आई। पता चला निगम ने भूमि अधिग्रहण पर आने वाले खर्च के लिए वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेने की संभावना पर विचार किया।
बैंक आफ इंडिया ने सरकार द्वारा शासकीय गारंटी देने पर ऋ ण देने पर सहमति भी दे दी। लेकिन सरकार ने शासकीय गारंटी देने में असमर्थता जता दी है। इससे प्रदेश के बड़े औद्योगिक विकास का एक महत्वाकांक्षी प्रस्ताव अधर में ही फं स गया है।
अब सरकारी खजाने से ही आस
औद्योगिक विकास विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक नोडल एजेंसी ने अब इस काम को आगे बढ़ाने के लिए सरकार के बजट से 1250 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। धनराशि मिलने के ही बाद ही औद्योगिकरण के लिए चिन्हित क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही की जा सकेगी।
अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में इस समय इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के कई प्रोजेक्ट पर एक साथ काम चल रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक, गंगा एक्सप्रेस-वे जैसे प्रोजेक्ट सरकार की प्राथमिकता में हैं। ऐसे में इस प्रोजेक्ट को कैसे आगे बढ़ाया जाएगा, अब यह सरकार को ही तय करना है।