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सांख्यिकी मंत्रालय करेगा घरों में समय उपयोग पर राष्ट

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सर्वे के आधार पर महिलाओं को मिलेगा ‘वर्क फ्रॉम होम’ का मौका
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सांख्यिकी मंत्रालय कर रहा घरों में समय के उपयोग पर राष्ट्रीय सर्वे, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव प्रवीण श्रीवास्तव ने दी जानकारी
भारत सांख्यिकी एवं कार्यान्वयन मंत्रालय लगातार इस तरह से सर्वे करके डाटा संकलित करता है, जिससे देश का सतत विकास हो सके। इसी कड़ी में मंत्रालय ने समय उपयोग सर्वे की शुरुआत की है। इसमें लोगों के समय के उपयोग और अवैतनिक गतिविधियों के बारे में सर्वे किया जाएगा। यह विशेष रूप से महिलाओं पर केंद्रित रहेगा। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि महिलाएं घरों में अपने समय का उपयोग कैसे कर रही हैं। इसके आधार पर उन्हें वर्क फ्रॉम होम के नये अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। भारत के प्रमुख सांख्यिकीविद् और सांख्यिकी एवं कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव प्रवीण श्रीवास्तव ने शनिवार को यह जानकारी दी। वे लखनऊ विश्वविद्यालय में ‘सांख्यिकी और सतत विकास के लक्ष्य’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे।
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श्रीवास्तव ने बताया कि कई बार महिलाएं घरों मे ऐसे काम करती हैं, जिनके लिए उन्हें कोई वेतन नहीं मिलता। दिसंबर तक इसकी रिपोर्ट जारी हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इस समय सातवीं आर्थिक गणना का काम चल रहा है। पहली बार आंकड़ों के संग्रहण, प्रमाणीकरण, रिपोर्ट तैयार करने और प्रसार के लिए तकनीक आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है। आर्थिक गणना का कार्य प्रगति पर है और दिसबर 2019 तक इसके पूरे होने की संभावना है। मंत्रालय एक अक्तूबर 2019 से वार्षिक अनिगमित क्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण शुरू करेगा।
यह सर्वेक्षण रोजगार के अतिरिक्तविनिर्माण, व्यापार एवं अन्य सेवा क्षेत्रों में कार्यरत अनिगमित गैर कृषि उद्यमों की आर्थिक एवं परिचालन संबंधी विशेषताओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराएगा। एक जनवरी 2020 से सेवा क्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण की शुरुआत होगी।
सर्वे के तरीके में बदलाव ने बढ़ाई बेरोजगारी दर
श्रीवास्तव ने मई में जारी हुए बेरोजगारी के आंकड़े पर भी सफाई दी। इस सर्वे में देश में बेरोजगारी की दर 6.1 प्रतिशत वार्षिक बताई गई थी। इसको लेकर विपक्ष ने बेरोजगारी बढ़ने की बात कही थी। उनके अनुसार देश में बेरोजगारी की दर नहीं बढ़ी है, बल्कि आंकड़े संकलित करने का तरीका बदला है और ज्यादा वैज्ञानिक तरीके से सर्वे हुआ है।
वैश्विक संस्थाओं के पास हमारा ही डाटा
सांख्यिकी सचिव ने बताया कि लोगों में यह गलत धारणा है कि यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन हमारे देश के बारे में बेहतर आंकड़े देते हैं। जबकि वास्तविकता इससे अलग है। इन संगठनों को भी आंकड़े देने का काम सांख्यिकी मंत्रालय ही करता है। कई बार ये संस्थाएं पुराने डाटा के आधार पर कोई तुलनात्मक विवरण जारी करती हैं, जबकि उसके बाद भारत में नये सर्वे हो चुके होते हैं।
सांख्यिकी के बिना शोध संभव नहीं
सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए लविवि कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि सांख्यिकी के बिना कोई शोध संभव नहीं है। विशिष्ठ अतिथि प्रो. पद्म सिंह ने गरीबी रेखा के पुनर्निधारण पर अपना व्याख्यान दिया। इस मौके पर प्रति-कुलपति प्रो. आरके सिंह, सामाजिक सांख्यिकी प्रभाग राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की अतिरिकत महानिदेशक शैलजा शर्मा समेत शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित थे। सेमिनार का आयोजन करने वाले सांख्यिकी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. शीला मिश्रा ने सभी का स्वागत किया तथा सेमिनार के आयोजन सचिव डॉ. आकाश अस्थाना ने सभी को धन्यवाद दिया।
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याद आई हाथ से घूमने वाली गणना मशीन
प्रवीण श्रीवास्तव लविवि के सांख्यिकी विभाग के ही पूर्व छात्र हैं। वर्ष 1978 में उन्होंने बीएससी मेें यहां दाखिला लिया था और वर्ष 1982 में यहां से गए। उन्होंने बताया कि आज भी वे उस समय को याद करते हैं जब तकनीक इतनी उन्नत नहीं थी। यहां तक कि कई अंक का गुणा करने के लिए मशीन का सहारा लेना पड़ता था। विभाग में इसके लिए एक बड़ी सी मशीन थी। इस मशीन को हाथ से घुमाकर गणना की जाती थी।
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