लखनऊ। अमर उजाला बोनस और केनरा रोबेको म्यूचुअल फंड की ओर से बुधवार को स्त्री शक्ति समृद्धि अभियान की शुरुआत की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि म्यूचुअल फंड में महिलाओं के लिए अपार संभावनाएं हैं। खासतौर पर 58 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं का निवेश तेजी से बढ़ा है। यदि वित्तीय निर्णय का अधिकार स्त्री के हाथ में हो तो वह स्वयं समृद्धि का मार्ग बना लेती है। यह अभियान आगामी दिनों में भी जारी रहेगा।
विकासनगर स्थित एक होटल में कार्यक्रम का शुभारंभ केनरा रोबेको म्यूचुअल फंड के नेशनल हेड (सेल्स एंड मार्केटिंग) गौरव गोयल, नॉर्थ बिजनेस हेड अरुण सरीन और यूपी हेड धीरज डीन ने किया। मुख्य वक्ता गौरव गोयल ने बताया कि देश में अभी मात्र छह प्रतिशत लोग ही म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, जबकि यूपी में इसमें बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। यूपी से 3.66 लाख करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है, जो प्रदेश की जीडीपी का लगभग 15% है।
उन्होंने बताया कि चार निवेशकों में केवल एक महिला निवेशक है। यानी 100 रुपये में महिलाओं का हिस्सा केवल 33 प्रतिशत है। हालांकि, तेजी से बदलते रुझानों में 58 वर्ष से ऊपर की महिलाओं का निवेश सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत की अर्थव्यवस्था 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है और तब मिडिल क्लास की आय दोगुनी होने की संभावना है।
कार्यक्रम में म्यूचुअल फंड उद्योग में बेहतर योगदान के लिए नम्रता केडिया को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने महिलाओं के प्रश्नों का समाधान भी किया।
म्यूचुअल फंड में तीन ‘एस’ से पूरी होती हैं जरूरतें
गौरव गोयल ने बताया कि पिछले 25 वर्षों में म्यूचुअल फंड 15 गुना बढ़ा है। निवेश में तीन ‘एस’ बेहद महत्वपूर्ण हैं— एसआईपी (सिस्टमैटिक इन्वेंस्टमेंट प्लान), एसडब्ल्यूपी (सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान) और एसटीपी (सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान)। उन्होंने कहा कि म्यूचुअल फंड निवेश विभिन्न क्षेत्रों में बड़े स्तर पर फैलता है, इसलिए जोखिम कम होता है। एसआईपी से नियमित बचत और सभी जरूरतें पूरी होती हैं। एसडब्ल्यूपी से निवेशक इक्विटी से घबराए बिना नियमित निकासी कर सकता है। एसटीपी के जरिये बड़ी कंपनियों में निवेश ट्रांसफर होता है, जिससे व्यवस्थित निकासी संभव बनती है।
लक्ष्य आधारित निवेश ज्यादा फायदेमंद
विशेषज्ञों ने बताया कि म्यूचुअल फंड में लक्ष्य आधारित, लंबे समय का निवेश सबसे लाभकारी होता है। छोटी रकम के साथ भी ओवरनाइट सेगमेंट में निवेश संभव है, जबकि महिलाएं मात्र 1000 रुपये से निवेश की शुरुआत कर सकती हैं।
पर्स के बजाय म्यूचुअल फंड में रखें पैसा
कार्यक्रम में समाजसेविका अंजू वार्ष्णेय ने म्यूचुअल फंड को महिलाओं के लिए जरूरी बताते हुए कहा कि वह 20 वर्ष की उम्र से एसआईपी के जरिये नियमित निवेश कर रही हैं। निवेश से प्राप्त रिटर्न से दो बार कार भी खरीद चुकी हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को छोटी-छोटी बचत पर्स में रखने के बजाय म्यूचुअल फंड में निवेश करनी चाहिए।
कार्यक्रम में पहुंचे लोग।
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