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कानपुर में बच्चों के उत्पीड़न का शर्मनाक मामला

Wed, 09 Mar 2016 07:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर
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बच्चों को क‌िया प्रताड़‌ित - फोटो : demo
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बिन माता-पिता के दो बच्चे ताई ने दस रुपये के स्टांप पर एक महिला को सौंप दिए। इनमें से एक बच्चे को बांधकर पीटने की शिकायत पर चाइल्ड लाइन मौके पर गई तो परत-दर-परत कई खुलासे हुए। पता चला कि मारपीट के कारण ही इनमें से एक बच्चा कहीं भाग गया था।
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पुलिस में इसकी गुमशुदगी तक नहीं दर्ज कराई गई थी। चाइल्ड लाइन ने गंगाघाट पुलिस और एसएसपी उन्नाव से शिकायत कर बच्चों की खरीद-फरोख्त की आशंका जताई है। अब यह मामला नौ मार्च को न्याय पीठ बाल कल्याण समिति के सामने रखा जाएगा।

बाबूपुरवा स्थित चाइल्ड हेल्प लाइन नंबर 1098 पर शिकायत मिली कि राजीव नगर शुक्लागंज, उन्नाव निवासी सावित्री देवी पत्नी जगन्नाथ दो बच्चों अनिल और कन्हैया को कई साल पहले लखनऊ से ले आई थी। वह उनसे काम कराते हैं पीटते हैं। इसी कारण अनिल दो साल से लापता है। गुमशुदगी भी नहीं लिखाई है। इसलिए बच्चा बेचने की आशंका है। अब कन्हैया को बांधकर पीटा जा रहा है।
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सूचना पाकर टीम मेंबर मिथलेश वर्मा और काउंसलर धर्मेंद्र ओझा शुक्लागंज थाने पहुंचे। थाने में मौजूद दरोगा को पूरी बात बताई तो उन्होंने गार्ड के साथ उन्हें महिला के घर भेजा। पूछताछ में सावित्री और उनके पड़ोसी राजेंद्र कुमार साहू ने उन्हें एक हलफनामा दिखाया। इस दस रुपये के हलफनामे में 21 मार्च 2012 की तारीख लिखी है।
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पढ़ें क्या बोले अधिकारी

बच्चों को बांधकर पीटा - फोटो : demo
इसमें लिखा है कि विशम्भर और शिव देवी अपनी इच्छा से अपने देवर के बच्चों अनिल (12) और कन्हैया (6) को जगन्नाथ कश्यप की पत्नी सावित्री कश्यप को दे रही हूं। जिन्हें बच्चे दे रही हूं वह मेरी मामी हैं। ये बच्चों की देखभाल अच्छी तरह करेंगी। 

चाइल्ड लाइन को जानकारी मिली कि सावित्री के खुद पहले से एक शादीशुदा बेटा है। उसके नाती भी है। अनिल दो साल पहले भाग गया था। एसएसपी से की शिकायत में राजेंद्र कुमार साहू का भी नाम है। सावित्री का कहना है कि बच्चों के मां-बाप नहीं थे, इसीलिए पालने को ले लिए थे। हलफनामे पर लिखा-पढ़ी भी की थी।

जिला प्रोबेशन अधिकारी आशुतोष स‌िंह का कहना, स्टांप पेपर पर लिखा-पढ़ी कर बच्चे किसी को नहीं दिए जा सकते हैं। माता-पिता की आम सहमति से बच्चा गोद नहीं दिया जा सकता है। बच्चा गोद लेने के लिए प्रोसेस पूरा कर जिला जज कोर्ट से सुपुर्दगी दी जाती है। जिन बच्चों का कोई नहीं होता तो वह राज्य सरकार के माने जाते हैं। खरीद-फरोख्त जांच का विषय है।

गंगाघाट के थानाध्यक्ष भूपेंद्र राठी ने कहा, चाइल्ड लाइन वाले रविवार को चौकी प्रभारी से मिले थे और पूरी बात बताई थी। चौकी प्रभारी ने महिला और बच्चे को बुलाया था। सोमवार को छुट्टी होने के कारण बच्चे को न्याय पीठ बाल कल्याण समिति के सामने पेश नहीं किया जा सका है। मंगलवार को समिति के सामने पेश करा दिया जाएगा।
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