लखनऊ। पीजीआई के वृंदावन कॉलोनी सेक्टर-4 निवासी महिला सिपाही शशिबाला से सरकारी विभाग में बाबू की नौकरी लगवाने के नाम पर 24.45 लाख रुपये ठग लिए गए। आरोप है कि जालसाजों ने उनके दोनों बच्चों की नौकरी लगवाने का झांसा दिया। पीड़िता ने चार अक्तूबर को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
शशिबाला स्मारक सुरक्षा समिति में सिपाही हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 10 जून को उनके पास अनजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को गोरखपुर में होमगार्ड विभाग के कमांडेंट का स्टेनो जितेंद्र गौतम बताया। उसने दावा किया कि कमांडेंट ने 40 बाबू पदों पर भर्ती का आदेश दिया है और वह उनके दोनों बच्चों की नौकरी लगवा सकता है। इसके लिए 24.45 लाख रुपये खर्च होने की बात कही गई। शशिबाला के मुताबिक, वह आरोपी की बातों में आ गईं और 10 जून से दो सितंबर के बीच उसके कहने पर सूरज नाम के युवक के बैंक खाते में 24.45 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बावजूद बच्चों की नौकरी नहीं लगी।
विरोध पर धमकाया और भेजा जाली आईडी कार्ड
शशिबाला ने बताया कि नौकरी न लगने पर उन्होंने आरोपियों से रकम और भर्ती के बारे में जानकारी मांगी। इस दौरान कुसुम नाम की महिला ने उनसे बात की। उसने खुद को डीजीपी कार्यालय का स्टेनो बताया और उन्हें धमकाया। आरोप है कि दबाव बनाने पर कुसुम ने उनके एक बच्चे के नाम की जाली नेमप्लेट और आईडी कार्ड भेज दिया।
दस नंबरों से ठग दे रहे धमकी
शशिबाला ने बताया कि इसके बाद भी नौकरी नहीं लगी तो उन्होंने 12 सितंबर को साइबर सेल जाकर सूरज का बैंक खाता फ्रीज करा दिया। आरोप है कि 17 सितंबर को सूरज ने फोन कर धमकी दी। कॉल काटने के बाद अलग-अलग 10 नंबरों से उन्हें फोन कर धमकाया गया। पीड़िता का कहना है कि धमकी भरे फोन अब भी आ रहे हैं। परेशान होकर उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत की। इंस्पेक्टर आलोक राय ने बताया कि मामले की तफ्तीश की जा रही है।