हरदी थाना क्षेत्र के दर्जनों गांवों में बीते कुछ महीनों से आतंक का पर्याय बनी मादा भेड़िया बुधवार की रात पिंजरे में कैद हो गई। उसके साथ उसका तीन माह का नर बच्चा भी पिंजरे में कैद हुआ। सुबह भेड़िए के पकड़े जाने की सूचना पर भारी मात्रा में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। स्वास्थ्य परीक्षण में दोनो भेड़िए एक दम स्वस्थ्य मिले हैं।
बहराइच वन प्रभाग के हरदी थाना क्षेत्र में बीते कई दिनों से लगातार भेड़िए के हमले की घटनाएं हो रही थी जिससे थाना क्षेत्र के दर्जनों गांवों में दहशत की स्थिति बन गई थी और लोग घरों से निकलने से भी कतरा रहे थे। वन विभाग की टीमें पांच स्थानों पर पिंजरा के साथ-साथ ट्रैपिंग कैमरे लगाकर भेड़िए को पकड़ने के लिए कांबिंग कर रही थी। बुधवार की रात सिसैया चूड़ामड़ी में लगे पिंजरे में आतंक का पर्याय बनी मादा भेड़िया अपने बच्चे के साथ कैद हो गई जिसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली।
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बताते चलें कि भेड़िया बीते शनिवार को ग्राम पंचायत महसी के मजरा नयापुरवा निवासी छोटू (1.5 वर्ष) को मां आशिया बेगम के पास से दबोच ले गया था जिसका क्षत विक्षत शव रविवार की सुबह गांव से दो किमी दूर खेतों में पड़ा मिला था। वहीं मंगलवार की रात बंभौरी निवासी हफीजा (70) को भी घायल कर दिया था। इससे पूर्व ग्राम पंचायत बंभौरी पांडेपुरवा के मिश्रनपुरवा निवासी तीन वर्षीय सायरा को उठा ले गया था। जिसका आज तक कोई अता पता नहीं लगा। भेड़िए ने औराही निवासी राहुल (6), वरमापुरवा निवासी ननकई (14), काजल (12) व जागीर निवासी तबस्सुम (35) समेत दर्जनों लोगों को घायल किया था।
छह वर्ष की है मादा भेड़िया व शावक तीन माह का
डिप्टी रेंजर अमित वर्मा ने बताया कि पकड़े गए भेड़ियों का स्वास्थ्य परीक्षण कतनिर्याघाट वन्यजीव प्रभाग में तैनात पशु चिकित्सक डॉ. दीपक वर्मा ने किया है। रिपोर्ट में मादा भेड़िया की उम्र लगभग पांच से छह वर्ष व नर बच्चे की उम्र लगभग दो से तीन माह है। दोनो पूरी तरह स्वस्थ मिले हैं।
बहराइच वन प्रभाग के डीएफओ संजीव कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य परीक्षण में दोनो स्वस्थ मिले हैं। उन्हें छोड़ने को लेकर उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया गया है। उनके निर्देशानुसार पकड़े गए भेड़ियों को चिड़ियाघर या जंगल में छोड़ा जाएगा।