हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह वाहनों का पंजीकरण करने से पूर्व सुनिश्त करे कि वाहन खरीदने वाले के पास पार्किंग के लिए स्थान है या नहीं।
कोर्ट ने सरकार को इस संबंध में तत्काल नियम बनाने का निर्देश है कि जब तक वाहन खरीदने वाले के पास अपने निवास स्थान पर पार्किंग के लिए जगह नहीं होगी तब तक उसके वाहन का पंजीकरण नहीं होगा।
कोर्ट ने सरकार को आवश्यक सेवाओं वाले वाहनों के आवगमन हेतु डेडीकेटेड कॉरिडोर बनाने पर तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है। ताकि ट्रैफि क जाम में फंसकर किसी मरीज की जान न जाए।
कोर्ट ने कहा है कि जाम में एंबुलेंस के फंसने से घायल या गंभीर मरीज को कोई नुकसान पहुंचता है तो जाम लगाने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति और यातायात कर्मी पर आपराधिक मामला चलाया जाए।
ट्रैफिक जाम में एंबुलेंस आदि फंसने की अक्सर हो रही घटनाओं को संज्ञान में लेकर कोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि दो माह तक यातायात जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाए।
लोगों को बताया जाए कि वह अपने वाहन सड़क के किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर खड़े न करें। सड़क, सड़क पटरी, सर्विस लेन खाली रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अभियान जल्दी चलाया जाए ताकि इसका औचित्य समाप्त न होने पाए।
कोर्ट ने कहा है कि ट्रैफिक सिग्नल या अन्य स्थानों पर जहां पर भी यातायात रोका जाए वहां यह सुनिश्चित किया जाए कि एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बिना बाधा के निकल सकें।
कोर्ट ने जागरूकता अभियान चलाने के बाद यातायात पुलिस और नागरिक पुलिस को यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखने और अतिक्रमण हटाने तथा पार्किंग की उचित व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।
इसमें असफल रहने वाले संबंधित कर्मचारी और अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी और उसके विरुद्ध आपराधिक तथा विभागीय कार्रवाई की जाएगी।