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‘जेल कर्मियों और कैदियों की मिलीभगत से वायरल हो रहे वीडियो’

Fri, 12 Jul 2019 11:07 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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नैनी जेल - फोटो : अमर उजला
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जेलों से लगातार बाहर आ रहे मामलों के वीडियो जेल कर्मियों और कैदियों की मिलीभगत से बनाकर वायरल किए जा रहे हैं। पहले उन्नाव फिर मऊ और अब इटावा से वायरल हुए वीडियो में जेल कर्मियों के गठजोड़ की पुष्टि हुई है।
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डीजी जेल आनंद कुमार ने बताया कि गुरुवार को इटावा जेल के नाम पर वायरल वीडियो जेल का नहीं है। चैनलों पर वीडियो प्रसारित होने के बाद इटावा के जेल अधीक्षक राज किशोर सिंह से रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट में राज किशोर ने वीडियो को पुराना और संपादित करके बनाने की बात कही है। उन्होंने इसे जेल कर्मियों और कैदियों की साजिश का हिस्सा बताया है। 

उन्होंने कहा है कि 29 जून को जेल वार्डर शिवनेश त्रिवेदी को अनुशासन हीनता व प्रभावशाली बंदियों के साथ मिलीभगत के आरोप में हटाया गया था। आशंका है यह वीडियो शिवनेश व उसके साथियों की साजिश का हिस्सा है। सोमवार को मऊ जेल से वायरल वीडियो भी मऊ जेल में ही शूट किया गया था। इसका खुलासा गोरखपुर रेंज की डीआईजी जेल श्रीपर्णा गांगुली की रिपोर्ट में हुआ है। 
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डीजी जेल ने बताया कि यह वीडियो मऊ जेल में ही सर्दियों में शूट किया गया था। वीडियो में जो शख्स कमेंट्री कर रहा है वह महीनों पहले रिहा हो चुका है। वीडियो किन जेल कर्मियों की मदद से बनाया गया इसकी पड़ताल की जा रही है। इसी तरह उन्नाव से वायरल वीडियो में भी जेल कर्मियों की संलिप्तता सामने आई थी। 
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जेल महकमे ने शासन से मांगे 1300 पुलिस कर्मी

जेलों में बंद कैदियों की मौज पर लगाम के लिए 1300 पुलिस कर्मी लगाए जाएंगे। जेल प्रशासन ने शासन को इसका प्रस्ताव भेजा है। शुरुआत में 25 संवेदनशील जेलों के लिए यह मांग की गई है। इन पुलिस कर्मियों पर प्रशासनिक नियंत्रण एसएसपी या एसपी का होगा जबकि इन्हें कब और कहां तैनात करना है, इसकी जिम्मेदारी जेल अधीक्षक की होगी। 

आनंद कुमार ने बताया कि प्रदेश के चारों कोने और मध्य में एक-एक हाई सिक्योरिटी जेल का भी प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसमें उन कैदियों को रखने का प्रस्ताव है जो बदमाशी अधिक करते हैं। जिन कैदियों के पास से कोई भी प्रतिबंधित सामान बरामद हुआ हो उसे भी इन्हीं जेलों में रखा जाएगा। 

जेल में किसी कैदी के पास प्रतिबंधित सामान मिलने पर सजा बढ़ाकर तीन साल या पांच साल करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। जेल में कैदियों तक मोबाइल पहुंचने के मामलों पर भी सख्ती से निपटने की रणनीति बनाई गई है।
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