जेलों से लगातार बाहर आ रहे मामलों के वीडियो जेल कर्मियों और कैदियों की मिलीभगत से बनाकर वायरल किए जा रहे हैं। पहले उन्नाव फिर मऊ और अब इटावा से वायरल हुए वीडियो में जेल कर्मियों के गठजोड़ की पुष्टि हुई है।
डीजी जेल आनंद कुमार ने बताया कि गुरुवार को इटावा जेल के नाम पर वायरल वीडियो जेल का नहीं है। चैनलों पर वीडियो प्रसारित होने के बाद इटावा के जेल अधीक्षक राज किशोर सिंह से रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट में राज किशोर ने वीडियो को पुराना और संपादित करके बनाने की बात कही है। उन्होंने इसे जेल कर्मियों और कैदियों की साजिश का हिस्सा बताया है।
उन्होंने कहा है कि 29 जून को जेल वार्डर शिवनेश त्रिवेदी को अनुशासन हीनता व प्रभावशाली बंदियों के साथ मिलीभगत के आरोप में हटाया गया था। आशंका है यह वीडियो शिवनेश व उसके साथियों की साजिश का हिस्सा है। सोमवार को मऊ जेल से वायरल वीडियो भी मऊ जेल में ही शूट किया गया था। इसका खुलासा गोरखपुर रेंज की डीआईजी जेल श्रीपर्णा गांगुली की रिपोर्ट में हुआ है।
डीजी जेल ने बताया कि यह वीडियो मऊ जेल में ही सर्दियों में शूट किया गया था। वीडियो में जो शख्स कमेंट्री कर रहा है वह महीनों पहले रिहा हो चुका है। वीडियो किन जेल कर्मियों की मदद से बनाया गया इसकी पड़ताल की जा रही है। इसी तरह उन्नाव से वायरल वीडियो में भी जेल कर्मियों की संलिप्तता सामने आई थी।