यादव-मुस्लिम वोटों के दम पर मुलायम सिंह आजमगढ़ में जीत का सपना संजोए बैठे हैं, साथ ही पिछले दो महीने के विकास कार्य भी उन्हें रेस में आगे बनाए हुए हैं।
चुनाव प्रचार का अंतिम दिन था। मुबारकपुर के बस स्टेशन चौराहे पर सैकड़ों की संख्या में लग्जरी कारें, मेटाडोर जैसे वाहन खड़े थे। सभी पर सपा का झंडा लगा है।
मुलायम की जहानागंज में होने वाली सभा में शामिल होने के लिए तैयारी में। यहीं बुनकर नेता इफ्तिखार अहमद मिलते हैं, हालांकि कुछ दिन पहले वे कुछ और बोल रहे थे।
सबब जानना चाहा तो बोले, पिछले 2 महीने से 18-20 घंटे बिजली आ रही है। पावरलूम जम कर चल रहे हैं। एक औसत बुनकर की आमदनी 150 रुपये रोजाना बढ़ गई। कस्बे में एक ट्रेड सेंटर का निर्माण शुरू हो गया है।
विकास से मुस्लिम भूले दंगे की टीस
कस्बे में एक ट्रेड सेंटर बन जाने पर स्थानीय बुनकर बिचौलियों के बजाय सीधे कारोबारियों का अपना उत्पाद बेच सकेगा।
चुनाव बाद कस्बे में एक बस स्टेशन बनाने का आश्वासन भी मिल चुका है। मुसलमानों का मन पसीजा है, और मुजफ्फरनगर दंगे की टीस के बावजूद मुलायम की रैली में जा रहा है।
पर, जहानागंज रैली में आए बुनकर याकूब कहते हैं कि यह सच है कि पिछले 15 दिनों में काफी कुछ बदला है। मुलायम का मुसलमानों में दखल बढ़ा है। मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर नाराजगी है पर नरेंद्र मोदी का सवाल मुजफ्फरनगर से बड़ा हो रहा है।
फिर भी बसपा के शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को पूरी तौर से खारिज नहीं किया जा सकता। विधानसभा चुनाव में सपा की हवा में अपनी सीट बचाई थी। एक साल से अधिक समय से क्षेत्र में सक्रिय भी हैं। दलितों का एकमुश्त समर्थन उनको दौड़ से बाहर नहीं रखेगा।
मुलायम के आने से बदला माहौल
आजमगढ़ शहर के दीन दयाल चौराहे पर सगड़ी क्षेत्र के यादव-मुस्लिम बहुल गांव जयराजपुर के किसान रामसमुझ यादव मिलते हैं। किसी निजी काम से शहर आए थे।
इलाके में किसका ज्यादा जोर है, के सवाल पर बताते हैं कि भाजपा प्रत्याशी रमाकांत दमदार नेता हैं, पर उन्होंने कोई काम नहीं किया। मुलायम के आने से माहौल बदला है। उनसे बड़ा यादव नेता कौन है? बिरादरी के भी हैं, विकास भी होगा।
जिले में विकास की एक ईंट किसी और ने लगाई है क्या? हां, मुलायम की जगह हवलदार या बलराम यादव होते तो रमाकांत भारी पड़ते। अतीत गवाह है कि मुलायम की सियासी ताकत यादव और मुसलमानों ने ही बढ़ाई है, पर विसंगति यह है कि आजमगढ़ में इन्हीं दोनों जातियों की तरफ से उन्हें चुनौती भी मिल रही थी।
पर बुनकर इफ्तिखार व जयराजपुर के रामसमुझ यादव की बातों से लगता है कि चुनाव का अंतिम दौर आते आते दोनों बिरादरियों का मिजाज कुछ बदला है। पर कितना बदला है ये तो चुनाव का नतीजा ही बता सकता है।
काम करेगा मुस्लिम यादव समीकरण
दरअसल, क्षेत्र में साढ़े तीन लाख यादव और ढाई लाख मुस्लिम मतदाता हैं। इन्हीं दोनों जातियों का झुकाव नतीजा तय करता है। सपा ने भी इन्हीं दोनों बिरादरियों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया है।
सपा नेता अपने प्रचार अभियान के दौरान यादव बहुल इलाके में मुलायम को बड़ा यादव नेता बता रहे हैं वहीं मुस्लिम इलाकों में अयोध्या विवाद में अपनी सरकार गंवाने वाली उनकी भूमिका तक की याद दिला रहे हैं।
पर, अपनी लकीर बड़ी करने के लिए विकास के मुद्दे की छौंक भी लगाई। ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग के बड़े कारोबारी शिव कुमार रूंगटा कहते हैं कि आजमगढ़ से मुलायम की उम्मीदवारी की घोषणा के पहले जिले में बमुश्किल 10-12 घंटे बिजली आती थी पर अब 20-22 घंटे बिजली आ रही है।
इससे न केवल इंडस्ट्री व बुनकरों को फायदा हुआ बल्कि आम आदमी का रहन-सहन भी सुधरा। निश्चित ही इसका कुछ न कुछ फायदा मुलायम को मिलेगा।
मुलायम करेंगे विकास
वहीं मतदान के तीन दिन पहले सपा को समर्थन का ऐलान करने वाले आजमगढ़ विकास संघर्ष समिति के एसके सत्येन कहते हैं कि आजमगढ़ में विकास के नाम पर जो कुछ भी है उसकी नींव सपा सरकार के कार्यकाल में रखी गई।
मुलायम जीते तो रफ्तार और तेज हो सकती है। बिजली तो 24 घंटे मिल सकती है। आखिर तीन साल तक प्रदेश में उन्हीं की सरकार रहनी है।
भाजपा से चुनौती
ऐसा भी नहीं कि मुलायम के बड़े कद व प्रदेश में सपा की सरकार होने के कारण चुनाव एकतरफा हो रहा हो।
साढ़े तीन लाख दलित व ढाई लाख मुसलमान मतों पर भरोसा कर जमाली समर्थक अपने को दौड़ से बाहर नहीं मान रहे हैं।
बसपा की प्रचार गाड़ी में बैठे सुरेश कहते हैं कि जमाली की ताकत को इस बात से समझिए कि उन्होंने सपा की हवा में अपनी सीट बचा ली।
आजमगढ़ के सैकड़ों नौजवानों को उन्होंने अपने कारोबार में नौकरी दी। क्या उनके परिवार यह एहसान भूल जाएंगे? वहीं तीन बार सांसद रह चुके भाजपा प्रत्याशी बाहुबली रमाकांत यादव की जमीनी पकड़ से विरोधी भी इन्कार नहीं करते।
काम करेगा मोदी फैक्टर
संभव है मुलायम के मैदान में होने के कारण यादव वोटों का झुकाव मुलायम की तरफ हो जाए पर मोदी फैक्टर होने के कारण हर बार के विपरीत इस बार उन्हें अच्छी संख्या में सवर्ण मत मिलेंगे।
शहर के वरिष्ठ वकील आनंद प्रकाश श्रीवास्तव कहते हैं कि विकास को कुनमुनाते लोग यदि मन मारकर मुलायम को वोट देने की सोच रहे हैं तो मोदी फोबिया से ग्रस्त सवर्ण समाज के लोग रमाकांत की छवि को नजरअंदाज कर कमल का बटन दबा सकते हैं।
पर श्रीवास्तव का कहना है कि यादव-मुस्लिम के शोर में अति पिछड़ों की कोई सुध नहीं ले रहा है जबकि उनका वोट भी ठीकठाक है।
फिलहाल उनका रुख भाजपा की ओर ज्यादा है। उलेमा काउंसिल, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी मैदान में हैं, पर शहर के किसी चौराहे पर उनकी दावेदारी पर चर्चा नहीं हो रही है।
मुलायम की ज्यादा संभवानाएं
यादव प्रत्याशी के लिए उर्वरा रही आजमगढ़ की जमीन प्रतिष्ठित शिबली पीजी कॉलेज में राजनीतिशास्त्र के अध्यक्ष डॉ. ग्यास अहमद खां पूरे परिदृश्य पर रोशनी डालते हुए कहते हैं कि ‘मुकाबला दिलचस्प है।
मुलायम के आने के पहले जातियों के पाले साफ-साफ बंटे दिखाई पड़ रहे थे, पर मुलायम के आने के बाद पहले के समीकरण गड्डमड्ड हो गए।
वैसे भी आजमगढ़ की जमीन यादव प्रत्याशी के लिए ज्यादा उर्वर रहती है। अब तक हुए 17 चुनावों में 11 बार यादव प्रत्याशी की जीत हुई है।’