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Lucknow News: चाचा की तुलना में पत्नी ज्यादा निकट की उत्तराधिकारी

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लखनऊ। मृतक की पत्नी पारिवारिक व विधिक संबंधों की दृष्टि से चाचा की तुलना में ज्यादा निकट की उत्तराधिकारी है। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अहम फैसले में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 2(वा) के तहत
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यह स्पष्ट किया है। इसके साथ मऊ के मोहमदाबाद निवासी ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि अजीत सिंह के लखनऊ में हुए हत्याकांड में चाचा की ओर से जांच स्थानांतरण के आग्रह वाली याचिकाओं पर आदेश देने से कोर्ट ने इन्कार कर दिया। हालांकि, पक्षकारों को समुचित स्तर पर कानून के मुताबिक ट्रायल कोर्ट के समक्ष अर्जी देने की छूट दी है।

अदालत ने कहा, पीड़ित या विधिक उत्तराधिकारी की पहचान के लिए अपनाई जाने वाली निकटतम विधिक उत्तराधिकारी की कसौटी पर पत्नी मृतक के चाचा से अधिक अधिकारयुक्त मानी जाएगी। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह फैसला राजेश सिंह की ओर से दाखिल दो याचिकाओं पर दिया। इनमें पुलिस से जांच हटाकर सीबीआई को सौंपने का आग्रह किया था। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता (मृतक का चाचा) न तो पीड़ित की श्रेणी में आता है और न ही उसे विधिक उत्तराधिकारी माना जा सकता है। निकटतम विधिक उत्तराधिकारी की कसौटी पर पत्नी का अधिकार उसके ऊपर है।
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वर्ष 2021 में हुए अजीत सिंह हत्याकाड़ की विभूति खंड थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। उनके चाचा ने यह आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट की शरण ली कि एक वरिष्ठ पत्रकार की ओर से जांच एजेंसी को प्रभावित किया जा रहा है। ऐसे में जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जानी चाहिए। मृतक की पत्नी पहले ही इसी तरह की याचिका दाखिल कर चुकी थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद पत्नी ने शीर्ष न्यायालय में दायर याचिका भी वापस ले ली।

कोर्ट ने कहा कि भले ही चाचा मृतक के निकट रहे हों, लेकिन विधिक दृष्टि से उन्हें पत्नी से ज्यादा निकट नहीं माना जा सकता। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के संदर्भ में भी कोर्ट ने माना कि चाचा न तो निकट संबंधी की श्रेणी में आते हैं और न ही विधिक प्रतिनिधि की।
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