लखनऊ। राजधानी स्थित एक अनुसंधान संस्थान में कार्यरत महिला की आपसी सहमति से दाखिल तलाक की अर्जी मंजूर हो गई है। अदालत ने उनके सात साल के बेटे को मां के साथ रहने की इजाजत दे दी है, जिसके लिए पति ने भी कोई आपत्ति नहीं की। मामले में अंतिम समाधान के रूप में उन्हें गुजारा भत्ता राशि भी मिली है।
महिला की शादी के साथ 2016 में शादी कोलकाता में हुई थी। दोनों ने शादी के बाद अपने कॅरिअर को वरीयता दी। पति को मोबाइल कंपनी में अच्छे पद पर नौकरी मिल गई, जबकि महिला को देश के प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थान में ग्रेड दो के पद पर नौकरी मिल गई थी। महिला लखनऊ में रहने लगी थी, जबकि उसका पति ऑस्ट्रेलिया में रह रहा था।
पति ने 2022 में कोलकाता में तलाक की अर्जी दी थी, लेकिन नैना के लिए कोलकाता में मुकदमे की पैरवी करना मुश्किल था। उसने सुप्रीम कोर्ट में मामले को लखनऊ पारिवारिक न्यायालय में स्थानांतरित करने की अर्जी दी। मामले में सुनवाई के बाद अंतिम समाधान के रूप में महिला को 50 लाख रुपये देने का अदालत ने आदेश किया है। वह अपने रिश्ते के खत्म होने का दुख तो है लेकिन उसे गर्व है कि वह अपने बेटे की अच्छी परवरिश कर पाएगी।