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...तो इसलिए ढह गया सीएम योगी का गोरखपुर किला, तीन दशक में पहली बार हुआ ऐसा

Fri, 16 Mar 2018 02:01 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा का गढ़ ढहाने में पार्टी का बिगड़ा बूथ प्रबंधन और कार्यकर्ताओं की नाराजगी बड़ी वजह रही। 1984 के बाद पहली बार भाजपा उम्मीदवार और चुनाव प्रबंधन की कमान गोरक्षपीठ से भाजपा के हाथ आते ही बाजी फिसल गई। हालांकि, भाजपा ने गोरखपुर में हार के लिए प्रशासनिक मशीनरी व पुलिस के नकारात्मक रवैये को जिम्मेदार ठहराया है।

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भाजपा का प्रदेश नेतृत्व भले ही प्रत्येक बूथ के प्रत्येक कार्यकर्ता का रिकॉर्ड होने का दावा करे, लेकिन मौके पर ऐसे भी हालात मिले कि बूथ अध्यक्ष के पास बूथ कमेटी की लिस्ट नहीं थी। बूथ अध्यक्ष को बूथ महामंत्री तक का पता नहीं था। आलम यह था कि गोरखपुर शहर की 705 में से 100 बूथ कमेटियों को बदलना पड़ा।

ग्रामीण इलाकों में और बुरा रहा हाल
ग्रामीण इलाकों में बूथ प्रबंधन की स्थिति और बदतर रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बृहस्पतिवार रात एक कार्यक्रम में माना कि कार्यकर्ता उदासीन हो गया था। इस वजह से मतदाता वोटिंग के लिए नहीं निकाला।
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कार्यकर्ता की नाराजगी को नजरअंदाज किया
भाजपा के प्रदेश नेतृत्व से लेकर चुनाव प्रबंधन में लगे नेताओं ने गोरखपुर के भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी को नजर अंदाज किया। गोरखपुर नगर निगम के चुनाव में टिकट वितरण को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में खासी नाराजगी थी। इसके चलते निगम में 70 में से भाजपा के केवल 22 पार्षद ही जीतकर आए थे।

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2017 के विधानसभा चुनाव में ऐसा था मतदान प्रतिशत

विधानसभा क्षेत्र--2017 में मतदान प्रतिशत--उपचुनाव में मतदान प्रतिशत--नतीजा
गोरखपुर ग्रामीण--59.85--37.76--16281 मतों से भाजपा हारी
गोरखपुर शहर--51.12--47.74--जीत का अंतर 60730 से घटकर 24577 रह गया।     
पिपराइच--63.66--52.24--जीत का अंतर 31708 से घटकर 243 रह गया।
कैम्पियरगंज--59.50--58.81--14130 से भाजपा की हार
सहजनवां--58.81--50.07--16377 मतों से हारी भाजपा

प्रशासनिक मशीनरी ने नहीं किया सही काम
भाजपा के प्रदेश मंत्री एवं गोरखपुर चुनाव प्रभारी अनूप गुप्ता का कहना है कि गोरखपुर में भाजपा की हार के लिए विपक्ष के गठजोड़ से ज्यादा प्रशासनिक मशीनरी का नकारात्मक रवैया जिम्मेदार है। चुनाव के दौरान ऊर्जा विभाग ने गोरखपुर शहर में लोगों के घरों और व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की कार्रवाई की।

गोरखपुर नगर निगम और प्रशासन की ओर से चुनाव के दौरान ही बाजार से अतिक्रमण हटाए गए। गोरखपुर के जिला प्रशासन ने नगर निगम चुनाव से भी सबक नहीं लिया। गोरखपुर में हजारों मतदाता नगर निगम चुनाव के खराब अनुभव के कारण यह सोचकर लोकसभा उपचुनाव में मतदान करने ही नहीं गए कि उनका नाम मतदाता सूची में नहीं होगा।
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