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Lucknow News: दिन से क्या घबराना, दिन तो आते जाते हैं...

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कविता पाठ करते मुकुल महान।
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लखनऊ। विश्व युवा कौशल दिवस के उपलक्ष्य में इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय आयोजन के आखिरी दिन बुधवार को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
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वरिष्ठ हास्य-व्यंग्य के कवि मुकुल महान ने सुनाया- माना हमारा देश ओलंपिक में फेल है, पर उल्लू सीधा करना हमारे बाएं हाथ का खेल है। आईएएस डॉ. हरिओम ने अपनी मशहूर रचना सिकंदर हूं मगर हारा नहीं हूं... सुनाकर वाहवाही लूटी।

गीतकार प्रियांशु गजेंद्र ने जीवन में हिम्मत न हारने का संदेश देते हुए रचना पढ़ी- फूलों के दिन शूलों के दिन, गुड़हल और बबूलों के दिन, दिन से क्या घबराना दिन तो आते जाते हैं। उन्होंने अपनी अन्य कविता यदि बंटोगे पिया तो कटोगे पिया... से भी हंसाया। कवयित्री सोनरूपा विशाल ने गीत सुनाया- मेरी कल्पित अभिलाषा को तुम स्वर्णिम विन्यास तो देना, बेशक मेरे साथ न चलना पर अपना अहसास तो देना।
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कवि पंकज प्रसून सुनाया- हम सोशल मीडिया के झूले में कुछ इस तरह से झूल रहे हैं, पासवर्ड तो याद है पर पड़ोसी को भूल रहे हैं।

डॉ. बलवंत सिंह ने भी शायरी से युवाओं की दाद पाई। उन्होंने पढ़ा- किसी फैसले पर पहुंचते नहीं हैं, बहुत सोचकर फैसला करने वाले। अखिलेश मिश्रा ने सुनाया- अब तुम लौट के मत आ जाना, मुझको मत आवाज लगाना। शहबाज तालिब ने पढ़ा- दूर होके भी मुझसे जिंदा हो, तुमको शर्मिंदगी नहीं होती। हास्य कवि हेमंत पांडेय ने भी अपनी कविताओं से खूब ठहाके लगवाए। आयोजन के दौरान लोकगायिका मालविका हरिओम मौजूद रहीं।
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