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रिजवान 28 तक, कौन होगा नया डीजीपी?

Fri, 21 Feb 2014 03:01 PM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
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लोक सभा चुनाव की अधिसूचना कभी भी लागू हो सकती है और यूपी के डीजीपी रिजवान अहमद भी एक हफ्ते में रिटायर होने वाले हैं।
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ऐसे में सूबे के नए डीजीपी का शीघ्र चयन होना चाहिए, लेकिन राज्य सरकार इस फैसले को लेकर असमंजस की स्थिति में है।

डीजीपी के पद के सीमित दावेदार होने की वजह से सरकार आखिरी वक्त तक फैसला लेने के मूड में नहीं दिख रही। रिजवान अहमद का रिटायरमेंट 28 फरवरी को है। इसके साथ ही नए डीजीपी का चयन भी हो जाना चाहिए।

लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार यह चयन नहीं कर पा रही है। डीजीपी पद के लिए सरकार के पाद बमुश्किल चार-पांच दावेदार हैं।

इनमें डीजी पुलिस भर्ती बोर्ड एके गुप्ता, डीजी पीएसी रंजन द्विवेदी, डीजी विजिलेंस एएल बनर्जी, डीजी सिविल डिफेंस बृजलाल और डीजी रूल्स एंड मैनुअल सुब्रत त्रिपाठी के नाम शामिल हैं।
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इनमें से बृज लाल के बसपा शासनकाल में डीजी होने की वजह से सपा ने सत्ता में आते ही उन्हें हटा दिया था।

लिहाजा सरकार बृजलाल को डीजीपी बनाएगी, इसमें संशय है। ऐसे ही सुब्रत त्रिपाठी को रूल्स एंड मैनुअल का डीजी बनाए जाने से साफ है सरकार उनसे किसी बात पर नाराज है, लिहाजा उनके नाम पर भी चर्चा नहीं है।

बाकी के तीन अधिकारियों में से हालांकि एके गुप्ता सबसे वरिष्ठ हैं और वह किसी विवाद में भी नहीं हैं।

राज्य सरकार ने सत्ता में आने के बाद उनका चयन नहीं किया था न ही रिजवान अहमद को डीजीपी बनाने के समय राज्य सरकार ने एके गुप्ता के नाम को विचार में नहीं लिया था।
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ऐसे में यह माना जा रहा है कि सरकार शायद ही एके गुप्ता को डीजीपी बनाना चाहती हो।

इसके पीछे यह भी कारण माना जा रहा है कि एके गुप्ता की छवि राजनीतिक दबाव में न आने वाले सख्त व इमानदार अधिकारी की है।

ऐसे में चुनाव के समय वह सरकार के लिए शायद ही मुफीद साबित हों। बचे दो अधिकारी रंजन द्विवेदी और एएल बनर्जी।

चर्चा है कि एएल बनर्जी को डीजीपी बनाने के लिए सरकार के नजदीक एक बड़ा व्यावसायिक घराना पैरवी में है, जबकि रंजन द्विवेदी की सत्ता में सीधी पकड़ की चर्चा है।

बावजूद इसके जब रिजवान अहमद को डीजीपी बनाया गया, तब सरकार ने इन दोनों ही अधिकारियों को ध्यान में नहीं रखा था।

इससे ही यह जाहिर हो गया था कि सरकार का उन पर वह भरोसा नहीं है जो रिजवान अहमद पर था।
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