लखनऊ। घर और या बाहर, आसपास हो रहा धूम्रपान आपको कैंसर रोगी बना सकता है। इंडियन जर्नल ऑफ ओटोलैरिंगोलॉजी एंड हेड एंड नेक सर्जरी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में यह बात सामने आई है। इसके अनुसार, गले और सिर के कैंसर के 76 फीसदी मरीज घर में और 72 फीसदी कार्यस्थल पर निष्क्रिय धूम्रपान के संपर्क में रहे थे।
अध्ययन में प्रो. अनुपम मिश्रा ने सिर एवं गर्दन के स्क्वैमस सेल कैंसर के मरीजों का विश्लेषण किया। इसमें मरीजों की उम्र, लिंग, धूम्रपान की अवधि और अन्य तंबाकू उत्पादों के इस्तेमाल का अध्ययन किया गया। मुंह और गले के कैंसर के मामले सबसे अधिक पाए गए। अध्ययन में शामिल 62 फीसदी मरीजों ने सौ से अधिक सिगरेट पी थीं, जिससे उनमें मुंह के कैंसर का जोखिम लगभग दोगुना पाया गया। नियमित धूम्रपान शुरू करने वालों में 21 फीसदी ने 40 की उम्र में यह आदत डाली। 15 साल से कम उम्र में धूम्रपान शुरू करने वालों में स्वरयंत्र का कैंसर अधिक मिला। धूम्रपान छोड़ने वाले 53 फीसदी लोग 50 या उसके बाद की उम्र के थे।
तंबाकू और शराब भी बड़ी वजह
चबाने वाले तंबाकू का इस्तेमाल 31.6 फीसदी मरीजों में, बीड़ी 16.8 फीसदी में और शराब 24.4 फीसदी मरीजों में कैंसर से संबंधित पाया गया।
रोकथाम के लिए सख्त उपाय
कैसर रोकने के लिए अध्ययन में किशोरों और युवाओं को तंबाकू से दूर रखने के लिए सख्त प्रतिबंधों की सिफारिश की गई है। वयस्कों के लिए नियमित परामर्श और नशा छोड़ने में मदद की आवश्यकता बताई गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिना मानक के बिक रहे तंबाकू उत्पादों के लिए मानकीकरण नीति लागू करने का आग्रह किया गया है।