बात 1852 की है, जब मुंशी नवल किशोर आगरा कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने प्राच्य विद्या विभाग में दाखिला लिया। उम्र 15 वर्ष ही थी, लेकिन आगरा से प्रकाशित उर्दू समाचार पत्र ‘सफीरे आगरा’ में लेख लिखने लगे थे। उनके पिता यमुना प्रसाद के मित्र मुंशी हरसुख राय कोहिनूर प्रेस चला रहे थे।
कोहिनूर प्रेस से ही उस समय का प्रसिद्ध उर्दू पत्र ‘कोहेनूर’ निकलता था। मुंशी नवल किशोर के पौत्र डॉ. रणजीत भार्गव ने एक संस्मरण में लिखा है, ‘नवल किशोर लाहौर चले गए और मुंशी हरसुख राय के पास रहकर प्रेस और पत्रिका का काम अच्छी तरह सीखा।