जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना का शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर शनिवार को हुआ दौरा पहले से तय था। ऐसे में उनके दौरे के दिन शहर की सफाई व्यवस्था चकाचक होनी चाहिए थी, मगर मंत्री को हर जगह चोक नाले और कूड़े के ढेर ही मिले, क्योंकि कार्यदायी संस्थाओं के जरिये तैनात करीब 30 प्रतिशत सफाई कर्मचारी गायब रहते हैं।
नगर निगम में करीब 12 हजार सफाई कर्मचारी हैं। इनमें करीब तीन हजार स्थायी और नौ हजार कार्यदायी संस्थाओं के जरिये तैनात हैं, लेकिन कितने कर्मचारी काम पर आते हैं और कितने नहीं, इसकी निगरानी का कोई ठोस सिस्टम नहीं हैं। जिन सफाई निरीक्षक और सुपरवाइजरों पर निगरानी की जिम्मेदारी है, वह खुद लापरवाही करते हैं। इसे लेकर उन पर कार्रवाई भी हुई, मगर उससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। इसकी वजह यह है कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी की जाती है। जिस औचक निरीक्षण वाले दिन कर्मचारी गायब मिलते हैं, उसी दिन का पैसा काटा जाता है, बाकी दिनों का नहीं। ऐसे में कर्मचारियों की तैनाती में फर्जीवाड़ा करने वालों को फर्क ही नहींं पड़ रहा।
केस-1 :
लाला लाजपत राय वार्ड में 29 मई को सफाई निरीक्षक ने अपर नगर आयुक्त के दौरे से पहले जांच की तो तैनात 42 सफाई कर्मचारियों में 29 गायब मिले थे। इसे लेकर कार्यदायी संस्था शार्क अटैकिंग पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
केस-2 : 19 मई को जिले के प्रभारी मंत्री ने नरही क्षेत्र का निरीक्षण किया था। इस दौरान सफाई व्यवस्था खराब मिली थी। जिस पर मंत्री ने नाराजगी जताई थी। उसके बाद निगम ने कार्यदायी संस्था वर्षा इंटरप्राइजेज पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।
तीन साल से ठप हाजिरी का सिस्टम
स्मार्टफोन से हाजिरी का सिस्टम करीब तीन साल ठप है, उसकी जगह कोई नया सिस्टम नहीं बनाया गया। इसके चलते सफाई कर्मचारियों की तैनाती में चल रहा खेल रुक नहीं पा रहा है। ऐसे में सालाना 140 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी शहर चमक नहीं रहा है। नगर निगम ने स्मार्टफोन से जब हाजिरी का सिस्टम शुरू किया था, तो कर्मचारियों की तैनाती में फर्जीवाड़ा पकड़ा जाने लगा था। मोबाइल से हाजिरी के समय 50 से 60 प्रतिशत कर्मचारी ही उपस्थित मिल रहे थे। ऐसे में कार्यदायी संस्थाओं के बिलों से गैरहाजिर कर्मचारियों की कटौती शुरू हो गई थी। कार्यदायी संस्थाएं प्रभावशाली लोगों की हैं और वह नेताओं से लेकर अफसरों तक को खुश करने में पैसा भी खूब खर्च करती हैं। ऐसे में ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए मोबाइल से हाजिरी का सिस्टम ही ठप कर दिया गया।
जिन वार्डों में मंत्री को मिली गंदगी, वहां तैनात इतने कर्मचारी
- फैजुल्लागंज वार्ड में निरीक्षण के दौरान नालियां चोक और जगह-जगह गंदगी मिली थी। यह हाल तब था, जब यहां सफाई के लिए 75 कर्मचारी कार्यदायी संस्था से तैनात हैं।
- अयोध्यादास वार्ड में भी निरीक्षण के दौरान सफाई व्यवस्था खराब मिली थी, जबकि यहां 55 सफाई कर्मचारी कार्यदायी संस्था से तैनात हैं।
- डालीगंज निरालानगर वार्ड में 90 कर्मचारी तैनात हैं, उसके बाद भी वार्ड चकाचक नहीं मिला था।
- अमीनाबाद का इलाका रानी लक्ष्मीबाई वार्ड में आता है। यहां के ऐतिहासिक घंटाघर पार्क में कूड़ा डंप मिला था, जबकि यहां 103 कर्मचारी तैनात हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
नगर निगम के कुल आठ जोन हैं। सभी जोनों में काम दो निजी कंपनियों को दिया गया है, जिन्हें अपने कर्मचारी लगाने है। नगर निगम को हाजिरी चेक नहीं करनी है, सिर्फ काम देखना है। इस कारण कोई नया सिस्टम नहीं बनाया गया। इधर कुछ कारणों से पांच जोनों में झाड़ू लगवाने का काम कार्यदायी संस्थाओं से कराया जा रहा है, उनकी हाजिरी को लेकर हर वार्ड में फोटो वाला रजिस्टर बनाया गया है। फिर उसका मिलान मास्टर रोल से होता है। कुछ समय में इन पांच जोनों का भी काम निजी कंपनी संभालेगी, ऐसे में हाजिरी की समस्या वहां पर भी समाप्त हो जाएगी।
- ललित कुमार, अपर नगर आयुक्तI