राज्य सरकार माध्यमिक शिक्षा परिषद से सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में भर्तियों में होने वाले ‘खेल’ को रोकने के लिए वेबसाइट बनवाने जा रही है। इसमें स्कूलों का पूरा इतिहास दर्ज होगा। मसलन स्कूल को अनुदान सूची पर कब लिया गया, इसमें छात्र संख्या कितनी है, शिक्षकों के कितने पद रिक्त हैं और कितनों पर भर्तियां हुई हैं।
यही नहीं भर्ती से पहले वेबसाइट पर रिक्त पदों का ब्यौरा भी अपलोड किया जाएगा ताकि स्कूल प्रबंधन भर्ती के नाम पर मनचाहे लोगों की तैनाती न कर सके। जल्द ही इस संबंध में शासनादेश जारी करने की तैयारी है।
राज्य सरकार समय-समय पर वित्तविहीन स्कूलों को अनुदान सूची पर लेती रहती है। इसमें संस्कृत, अल्पसंख्यक के साथ इंटरमीडिएट कॉलेज शामिल होते हैं। अल्पसंख्यक स्कूलों में शिक्षकों, प्रधानाचार्यों के साथ बाबुओं की भर्ती का अधिकार स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के पास है।
सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों के संबद्ध प्राइमरी में स्कूल प्रबंधन जिला विद्यालय निरीक्षक से अनुमति लेकर भर्तियां करता है और प्रवक्ता व प्रधानाचार्य के पद पर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड भर्तियां करता है। इसी तरह संस्कृत इंटर कॉलेजों और महाविद्यालयों में मंडलीय समिति को शिक्षकों की भर्ती का अधिकार है।