भाजपा के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर पंचायत चुनाव नतीजों को भाजपा के लिए सबक मानने से इन्कार करते हैं। उनका मानना है कि इन चुनावों में भाजपा हारी नहीं बल्कि जीती है। इसके लिए वह कई तर्क देते हैं। दल के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने वालों के साथ भी वह बहुत कठोर व्यवहार के पक्ष में नहीं है।
इसके बजाय वह उन लोगों पर सख्ती करने व कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं जो सांसद, विधायक और पदों पर बैठे होने के बावजूद अधिकृत प्रत्याशियों को पराजित करने के लिए सक्रिय रहे हैं।
बुधवार को पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान माथुर ने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश में अभी तक जिला पंचायत चुनाव मुख्य रूप से सत्तारूढ़ दल के ही होते थे। भाजपा इन चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारती ही नहीं थी। गांव-गांव पार्टी के लोग खड़े करने के लिए यह चुनाव लड़ने का प्रयोग किया गया।
भाजपा इन चुनाव में उतरकर गांवों के मतों में पहली बार बंटवारा करने में कामयाब रही। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि इन चुनाव के जरिये पार्टी को 4000 से ज्यादा ऐसे कार्यकर्ता मिले हैं जो 30-40 गांवों के बीच भाजपा का झंडा, बैनर व पोस्टर व नेताओं का नाम लेकर घूमे हैं। जाहिर है कि आगे के चुनाव में यह सभी हमारे लिए स्थानीय प्रमुख नेताओं के रूप में काम करेंगे।