उर्दू के पिछड़ेपन के लिए हम खुद जिम्मेदार : रजा मुराद
मिसरों पर आधारित सुहैल काकोरवी की पुस्तक ‘नवलोकन’ का विमोचन
लखनऊ। बड़े बे-आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले...। खुदी को कर बुलंद इतना... जैसे आम आदमी से लेकर संसद तक गूंज रखने वाले मशहूर मिसरों पर आधारित शायर सुहैल काकोरवी की 12वीं किताब ‘नवलोकन’ का रविवार को विमोचन किया गया। वक्ताओं ने इस दौरान उर्दू के पिछड़ेपन के साथ ही वर्तमान माहौल में शायरी की अहमियत व जिम्मेदारी पर भी चर्चा की।
हिंदी उर्दू अवॉर्ड कमेटी व अदबी संस्थान की ओर से निर्यात भवन के एक्सपो सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि फिल्म अभिनेता रजा मुराद ने कहा कि मौजूदा माहौल में उर्दू पिछड़ती जा रही है। इसके लिए तमाम लोग सरकार को जिम्मेदार मानकर उर्दू के साथ सौतेला व्यवहार करने की बात करते हैं।
उन्होंने कहा कि उर्दू के पिछड़ेपन के लिए सरकार से ज्यादा हम खुद जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने बच्चों को शुरुआत से ही उर्दू की तालीम देनी होगी। उन्होंने अपने गुदगुदे अंदाज से दर्शकों को भी हंसाया। सुहैल काकोरवी के लिए कहा कि काकोरी का तसव्वसुर वहां के कबाब, काकोरी कांड और सहुैल काकोरवी के बगैर नहीं किया जा सकता। शाफे किदवई ने कहा कि आज नई तरह की दुनिया हमारे सामने हैं, जो तकनीक के साथ ही झूठ पर भी आधारित है। सेल्फी अब लोककला बन चुकी है। ऐसे में शायरी सच को कायम रखने का सत्याग्रह है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शारिब रुदौलवी ने कहा कि नवलोकन किताब में सुहैल ने गालिब व इकबाल के शेर और आम आदमी से लेकर संसद में गूंजने वाले 70 से ज्यादा मिसरों को नई दृष्टि से देखा है। आईआरएस अफसर सुबूर उस्मानी ने कहा कि सुहैल काकोरवी एक फल पर आधारित पुस्तक आमनामा के जरिये अपना नाम लिम्बा बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज करा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सुहैल काकोरवी ने उन मुश्किल जमीनों में गजलें कही हैं, जिनसे बचकर दूसरे निकल गए। गुफरान नसीम के संचालन में सजे कार्यक्रम में प्रो. सिराज अजमली, अतरह नबी, कवि डॉ. सुरेश कुमार, तहसीन उस्मानी, अनवर हबीब अलवी ने भी अपने विचार रखे।