दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भले ही लोगों को सस्ता पानी देने
का आदेश कर चुके हों पर उत्तर प्रदेश में पानी की कीमतों में इजाफे की
तैयारी है।
स्थानीय निकाय निदेशालय से मिले प्रस्ताव पर शासन स्तर पर मंथन
शुरू हो गया है और अधिकारी नई दरें लागू करने पर काफी हद तक एकमत हैं।
पर,
अंतिम निर्णय नगर विकास मंत्री आजम खां करेंगे। उनकी सहमति के बाद ही नई
दरें लागू की जाएंगी।
इस बाबत प्रमुख सचिव नगर विकास सीबी पालीवाल कहते
हैं कि निदेशालय से मिले प्रस्ताव पर विचार हो रहा है, मंत्री इस पर अंतिम
निर्णय करेंगे।
प्रदेश के सात शहरों लखनऊ,
आगरा, इलाहाबाद, कानपुर, मेरठ, वाराणसी व मथुरा में जवाहर लाल नेहरू अरबन
नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) योजना के तहत लोगों को बेहतर जलापूर्ति के
लिए काम किए जा रहे हैं।
इस योजना की शर्त है कि शहरी लोगों से लागत के
अनुरूप वाटर टैक्स की वसूली की जाए। इसके आधार पर जिन शहरों में जेएनएनयू
आरएम योजना का काम चल रहा है, वहां पानी का मीटर लगाने का आदेश किया जा
चुका है।
लेकिन नगर विकास विभाग चाहता है कि सभी नगर निगमों व मथुरा में
वाटर टैक्स की नई दरें एक साथ लागू की जाएं। इसके लिए इन शहरों में खर्च के
हिसाब से मूल्य वृद्धि का प्रस्ताव मांगा गया था।
स्थानीय
निकाय निदेशालय ने हालांकि यह प्रस्ताव सितंबर 2013 में ही भेज दिया था,
लेकिन मीटर लगाने की अनुमति नगर विकास मंत्री से न मिलने की वजह से नई दरों
पर विचार नहीं हो रहा था।
मंत्री ने शहरों में पानी का मीटर लगाने की
अनुमति दे दी है। इसलिए अब इस पर विचार-विमर्श शुरू हुआ है। नई दर से वाटर
टैक्स वसूली के लिए प्रस्ताव में कुल सात श्रेणियां निर्धारित की गई हैं।
इसमें 2000 किलो लीटर को श्रेणी एक, 2000 से 4000 किलो लीटर श्रेणी दो,
4000 से 6000 श्रेणी तीन, 6000 से 8000 श्रेणी चार, 8000 से 10,000 श्रेणी
पांच और 10,000 से 12,000 किलो लीटर को श्रेणी छह तथा इससे अधिक को श्रेणी
सात में रखने का प्रस्ताव है।