प्रदेश के प्रमुख शहरों में वाटर मीटर लगाने की तैयारियों के तहत अधिकारियों की एक टीम उन राज्यों का दौरा करेगी जहां ये मीटर लगे हैं।
अधिकारी उन राज्यों के म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के अफसरों से मिलकर इसके फायदे और नुकसान का पता करेंगे। इसके बाद ही उत्तर प्रदेश में इस बारे में निर्णय किया जाएगा।
जवाहर लाल नेहरू अरबन नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) योजना की शर्तों के मुताबिक 10 लाख से अधिक आबादी वाले प्रमुख शहरों में लोगों को बेहतर जलापूर्ति देने के साथ वाटर मीटर लगाया जाना अनिवार्य किया गया है।
प्रदेश में भी इसे लगाने संबंधी कैबिनेट का प्रस्ताव पास हो चुका है पर पिछले दिनों अधिकारियों की बैठक में नगर विकास मंत्री आजम खां ने वाटर मीटर लगाने संबंधी प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
उन्होंने कहा था कि जितना पैसा वाटर मीटर लगाने पर खर्च होगा, उतने में नए क्षेत्रों में पाइप लाइन डाल दी जाएगी। हालांकि केंद्रीय शर्तों की अनदेखी नहीं की जा सकती है।
इसके आधार पर ही अन्य राज्यों का दौरा कर अधिकारी यह देखेंगे कि इसके कितने फायदे हैं।
प्रमुख सचिव नगर विकास सीबी पालीवाल ने कहा कि पहले परीक्षण कर लिया जाएगा कि इसके क्या फायदे हैं, इसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।