श्रावस्ती। जिले सहित नेपाल व पहाड़ों पर होने वाली बरसात के कारण राप्ती नदी का जलस्तर घट-बढ़ रहा है। सोमवार सुबह राप्ती बैराज पर नदी खतरे के निशान को छूकर घटने लगी है। इसके साथ ही नदी के कछार में बसे गांव में कटान तेज हो गई है। इससे कछार वासियों की दुश्वारी बढ़ गई है।
तराई सहित नेपाल में मेघ मेहरबान हैं। विगत तीन दिनों से रुक-रुककर होने वाली बरसात के कारण सिरसिया क्षेत्र के पहाड़ी नाले उफान पर आ गए हैं। इसके साथ ही राप्ती नदी का जलस्तर भी घट-बढ़ रहा है। रविवार देर रात तक जमुनहा के राप्ती बैराज पर जलस्तर खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर कम था जो सोमवार सुबह आठ बजे खतरे के निशान 127.70 सेंटी मीटर पहुंच गया।
हालांकि इसके बाद जलस्तर तेजी से घटता हुआ सुबह नौ बजे 127.60 सेंटीमीटर व 10 बजे 127.40 सेंटीमीटर पहुंच कर स्थिर हो गया। इस दौरान नेपाल के कुसुम बैराज से राप्ती नदी में 30375 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। इसमें से 700 क्यूसेक पानी मुख्य राप्ती नहर में छोड़ गया। शेष पानी राप्ती नदी में छोड़े जाने से नदी की उग्र लहरें इकौना के जगरावलगढ़ी, कुम्हारगढ़ी व टेंडवा सहित अपने तट पर बसे कई अन्य गांवों में खेतों में कटान कर रही है। इससे कछार वासियों की धड़कने बढ़ गई हैं। जिले में होने वाली बरसात के कारण जगह-जगह कीचड़ व जलभराव की समस्या उत्पन्न हो जाने के कारण लोगों की दुश्वारियां भी बढ़ी हैं। संवाद