कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में सोमवार को भी अनुयायियों का तांता लगा रहा। श्रीलंका से 140, नेपाल से 10, महाराष्ट्र से 125 व अन्य 40 अनुयायियों ने तपोस्थली पहुंच कर जेतवन स्थित गंध कुटि पर अपने रीति रिवाज में प्रार्थना किया। इस दौरान बौद्ध भिक्षुणी सुमेदा थेरो के नेतृत्व में बौद्ध सभा का आयोजन भी किया गया।
बौद्ध सभा के दौरान बौद्ध भिक्षुणी सुमेदा थेरो ने कहा कि बुद्ध के अनुसार मानव जीवन दुखो से परिपूर्ण है। उन्होंने जन्म और मरण के चक्र को दुखों का मूल कारण माना। और बताया कि किसी भी धर्म का मूल उद्देश्य मानव को इस जन्म और मृत्यु के चक्र से छुटकारा दिलाना होना चाहिए। कहा कि अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), अपरिग्रह (किसी प्रकार कि संपत्ति न रखना), मध सेवन न करना, असमय भोजन न करना, सुखप्रद बिस्तर पर नहीं सोना, धन संचय न करना, स्त्रियों से दूर रहना, नृत्य गान आदि से दूर रहना। इसके बाद सभी उपासकों ने तपोस्थली का भ्रमण किया। इस मौके पर काफी संख्या में उपासक उपासिकाएं मौजूद रहीं। संवाद