संवाद न्यूज एजेंसी
बलरमपुर। राप्ती नदी के कटान प्रभावित गांवों के अस्तित्व को बचाने का प्रयास जारी है। राप्ती नदी का जलस्तर घटने के साथ ही कटान भी तेज हो गई है जिससे ग्रामीणों में दहशत है। बाढ़ खंड के अधिकारी राप्ती नदी से प्रभावित गांवों में कटानरोधी कार्य कराने में जुटे हुए हैं। जिले में बीते चार दिनों से भारी बारिश के चलते राप्ती नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर गया था लेकिन शनिवार को राप्ती नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु से आठ सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। बारिश के चलते कीचड़ व गंदगी से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
एडीएम वित्त एवं राजस्व अरुण कुमार शुक्ल ने बताया कि सदर व उतरौला तहसीलों के कटान प्रभावित गांवों में बाढ़ खंड के अधिकारी कटानरोधी कार्य में जुटे हुए हैं। राप्ती नदी के दाएं तट पर स्थित बलरमपुर-भड़रिया तटबंध के 32.6 किलोमीटर के निकट स्थित लालनगर में तटबंध व आबादी की सुरक्षा के लिए कटानरोधी कार्य युद्घ स्तर पर कराए जा रहे हैं। शनिवार को राप्ती नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु 103.62 मीटर के सापेक्ष 103.54 मीटर तक घटकर पहुंच गया है। गत वर्ष बाढ़ खंड के अधिकारियों ने ग्राम परसौना, उतरौला तहसील के ग्राम गोनकोट, करमहना-भोजपुर तटबंध, नौबस्ता, रजवापुर, भोजपुर-शाहपुर तटबंध, ग्राम जेनुका, नयनसुखवा, कल्यानपुर व ढोंढरी गांव सहित 36 स्थानों पर कटानरोध कार्य कराए गए थे जिसेकी निगरानी की जा रही है।
बंबू क्रेट, ट्री स्पर व नायलान क्रेट में बालू की बोरियों को रखकर बंबू परक्यूपाइन लगाकर कटान को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। एसडीआरएफ की टीम गांवों में कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को आपदा से बचने का उपाय बता रही है। कलेक्ट्रट सहित जिले के तीनों तहसीलों में कंट्रोल रुम संचालित है जिसके माध्यम से कटान प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी भी कराई जा रही है। राजस्व निरीक्षकों व लेखपालों को कटान प्रभावित गांवों पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि राप्ती नदी का जलस्तर घटने के साथ ही कटान तेज हो गई है। कटान करके राप्ती नदी किसानों के बेशकीमती जमीनों को निगल रही है। प्रशासन को कटानरोधी कार्य में तेजी लाना होगा।