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दाऊद इब्राहिम के गुर्गे और वसीम रिजवी के बीच हुई बातचीत पढ़ें यहां...

Sun, 14 Jan 2018 04:00 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मोबाइल नंबर जिससे आयी कॉल।
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उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी को जिस नंबर से धमकी भरा फोन आया था, वह नेपाल का बताया जा रहा है। वसीम रिजवी के फोन में कॉल रिकॉर्डिंग सॉफ्टवेयर में यह कॉल रिकॉर्डर हो गई।

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रिजवी ने यह रिकॉर्डिंग और रिसीव कॉल का स्क्रीनशॉट पुलिस को सौंपा है। कॉल करीब 11 बजे आयी थी। 2 मिनट 39 सेकेंड तक हुई इस बातचीत में एक व्यक्ति खुद को दाऊद इब्राहिम का आदमी बताते हुए वसीम को मौलानाओं से माफी मांगने की धमकी दे रहा है। दोनों के बीच हुई बातचीत इस प्रकार है...


कॉलर: वसीम रिजवी बोल रहे हो?
वसीम रिजवी: हां बोल रहा हूं, कौन बोल रहा है?

कॉलर: भाई का मैसेज है तेरे लिए...
वसीम रिजवी: कौन बोल रहा है?

कॉलर: शर्म नहीं आ रही तुझे मुसलमान होकर मुसलमानों को मरवाने की बात करे है।
वसीम रिजवी: भाई मैंने कौन से मुसलमानों को मरवाने की बात कर दी भाई अगर मुसलमानों के बच्चों को अच्छी शिक्षा देना, ये मुसलमानों को मरवाना है तो, तो मैंने तो ऐसी कोई बात नहीं की भाई
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वसीम रिजवी: कौन बोल रहा भाई?
कॉलर: मुसलमान मरे तो आवाज क्यों नहीं उठाता?

वसीम रिजवी: अरे भाई बिल्‍कुल आवाज उठायी जाती है, अगर कोई मुसलमान मरता है तो, मुसलमान क्या कोई भी मरे गलत है। हर आदमी हर मुसलमान आवाज उठाता है।
कॉलर: भाई ने कहा ‌‌था एक बार समझा देना उसे, इसलिए समझा रहा हूं।

वसीम रिजवी: अरे भाई, कौन भाई, कौन बोल रहे हो?
कॉलर: भाई को न जाने है तू, दाऊद भाई का नाम न सुन रखा है कि न!

वसीम रिजवी: कौन भईया?
कॉलर: दाऊद भाई, दाऊद इब्राहिम।

वसीम रिजवी: अच्छा, अच्छा अच्छा तो कोई**** बोल रहे हो, तुम दाऊद इब्राहिम...
कॉलर: दो मिनट भी न लगने है तेरे परिवार को उड़ाने में...

वसीम रिजवी: अच्छा हिम्मत है तो आ जाओ
कॉलर: अपनी मौत का जिम्मेदार तु खुद होगा, अभी भी वक्त है मौलानाओं से माफी मांग ले

वसीम रिजवी: अरे भईया ऐसा है हो सकता है तुम्हारी मौत तुमको बुला रही हो, मौलानाओं से क्यों माफी मांग लें भाई? अच्छा आओ... हम माफी मांग लेंगे, आओ आके हमसे मिलो
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कॉलर: चल, चल कोई बात न, मौत जिसे खुद ढूंढ रही हो कोई उसे क्या समझा सके है

कॉलर: अपनी मौत का इंतजार करियो
वसीम रिजवी: अरे देखो जब तक अल्लाह जिंदा रखता है, तब तक कोई मार नहीं सकता, तुम्हारा बाप दाऊद इब्राहिम क्या अबू बकर बगदादी तक नहीं मार सकता,
तुममे हिम्मत हो तो आओ, आके बात करो, आओ हम सब वापस ले लेंगे, बाबरी मस्जिद का भी केस वापस ले लेंगे, आओ तो हमसे मिलो तो, मुल्लाओं से माफी भी मांग लेंगे और खत भी अपना वापस ले लेंगे, तुम आओ आके मिलो।

कॉलर: चल ठीक है समझाने के लिए सोच रखी थी तुझे, न समझ में आ रही तेरे, अब बाद में समझ लेंगे तुझे।

इसके बाद दूसरी तरफ से फोन कट जाता है।

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