नगर निकाय चुनाव में मतदाता सूची से नाम कटने पर कई जगहों पर तनाव रहा। बड़ी संख्या में लोगों ने आरोप लगाए कि उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व एमएसएमई मंत्री कलराज मिश्र का नाम भी मतदाता सूची से गायब था। वे बिना वोट डाले ही अपने काम से रायबरेली चले गए। उन्होंने बताया कि सुबह ही उन्होंने अपने प्रतिनिधि के जरिए महात्मा गांधी वार्ड स्थित मतदान केंद्र से इस बारे में मालूमात करवा ली थी।
जब नाम ही नहीं था तो मतदान केंद्र जाकर क्या करते। खास बात है कि पिछले निकाय चुनाव में भी उनका नाम सूची में नहीं था। कलराज ने बताया कि उन्होंने इस दफा सूची में नाम जुड़वाने के लिए जरूरी कार्यवाही भी करवाई थी, फिर भी नाम नहीं दर्ज हो पाने पर उन्होंनेमलाल जताया।
इसके अलावा मतदाता सूची में गड़बड़ियों के बीच लखनऊ के तीन बार मेयर रह चुके दाऊजी गुप्ता भी वोट नहीं डाल सके, क्योंकि उनका भी मतदाता सूची में नहीं था। उन्होंने करीब तीन घंटे अपने और अपने परिवार का नाम सूची में तलाशा, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
उन्होंने इन हालात पर प्रतिक्रिया में कहा कि उनसे उनका लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिया गया। उनका नाम लिस्ट में नहीं मिलने पर भाजपा, सपा और अन्य दलों के क्षेत्रीय नेताओं ने मतदान केंद्र पर जमकर हंगामा किया।
परिवार के 20 सदस्यों के साथ वोट डालने पहुंचे दाऊजी 1971 से 1992 की अवधि में तीन दफा लखनऊ के मेयर रहे हैं। वे अपने परिवार के सदस्यों के साथ बशीरतगंज वार्ड के हिंदू बाल विद्यालय मतदान केंद्र में अपना नाम तलाशते रहे गए। तीन घंटे मेहनत करने के बाद परिवार के चार नवयुवा वोटर्स कार्तिक, अंकित, स्वर्णेश और यशी के नाम सूची में मिले। ये चारों पहली बार वोट दे रहे हैं।