कवि सम्मेलन में प्रस्तुति देते शायर।
लखनऊ। गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा रोड स्थित आल इंडिया कैफी आजमी एकेडमी में मंगलवार को कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें उर्दू शायरी की समृद्ध विरासत के लिए स्व. प्रो. मलिकजादा मंजूर अहमद को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अध्यक्षता प्रो. अब्बास रजा नैय्यर ने की।
इस अवसर पर उस्मान मीनाई, इकबाल हुसैन, सरला शर्मा समेत कई प्रसिद्ध शायरों ने एक से बढ़कर एक पंक्तियां सुनाईं। कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो. नैय्यर ने मेरा रंग दे बसंती चोला सुनाकर समा बांध दिया। नाजिया जाफरी ने ए काश इतना होता मेरे एख्तियार में, नफरत के सारे रंग बदल देती प्यार में पेश कर महफिल लूट ली। प्रतिभा श्रीवास्तव ने मेरे हक में भी दुआ यार करा दे कोई और वासिफ फारूकी ने जंग में कागजी अफराद से क्या होता है, हिम्मत हो तो तादाद से क्या होता है पढ़कर तालियां बटोरीं।
अकादमी के सचिव सईद मेहंदी ने कैफी आजमी के प्रसिद्ध शेर प्यार का जश्न नई तरह मनाना होगा के साथ कार्यक्रम का समापन किया और बताया कि उर्दू की गंगा-जमुनी तहजीब को संरक्षित करने के इस आयोजन को हर साल आयोजित किया जाएगा। अवसर पर पूर्व आईपीएस डॉ. अनिल मिश्रा, अभिश्रेष्ठ तिवारी, सरला शर्मा, रामप्रकाश ''बेखुद'' समेत बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।