बिना आर्म्स ट्रेनिंग के प्रशांत को दी गई थी पिस्टल
इस मामले की मजिस्टीरियल जांच में प्रशांत चौधरी को ही मुख्य आरोपी बताया गया था। रिपोर्ट में सामने आया था कि प्रशांत को बिना आर्म्स ट्रेनिंग के ही पिस्टल जारी कर दी गई थी। इसको लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
तत्कालीन अपर नगर मजिस्ट्रेट सलिल कुमार पटेल को विवेक तिवारी हत्याकांड की जांच 29 सितंबर को सौंपी गई थी। 15 फरवरी को अपर नगर मजिस्ट्रेट ने जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी थी। कुल 15 पन्नों की रिपोर्ट में कल्पना, घटना की चश्मदीद सना, दोनों आरोपियों और मौके पर सबसे पहले पहुंचने वाले पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए गए थे। रिपोर्ट में तब भी यही कहा गया था कि हत्या किसी साजिश के तहत नहीं की गई थी। प्रशांत ने अपने बयान में कहा था कि उसे पिस्टल चलाने का प्रशिक्षण नहीं मिला था।
एसआईटी ने की थी जांच, फैसला आते ही बिलख पड़े आरोपी
मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने प्रकरण की जांच एसआईटी को सौंपी थी। लंबे समय तक पड़ताल के बाद एसआईटी ने आरोप पत्र दाखिल किया था। जेल में बंद संदीप को कुछ समय बाद जमानत मिल गई थी। उधर, बृहस्पतिवार को फैसला आते ही कोर्ट में मौजूद प्रशांत और संदीप बिलख पड़े। वहीं, कल्पना की आंखे भी भर आईं। वह मायूस हाेकर कोर्ट से भाई के साथ निकल गईं।