विहिप के सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट की दूसरी बैठक भी जल्द होगी। एक पखवारे के भीतर यह बैठक अयोध्या में हो सकती है। संभावना यही है कि मार्च के पहले सप्ताह बैठक करके मंदिर निर्माण की योजना से संबंधित जरूरी फैसले ले लिए जाएं। जिनमें मंदिर निर्माण से संबंधित कई जरूरी फैसले किए जाएंगे।
पहली बैठक में महंत नृत्यगोपाल दास तथा विहिप के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय को ट्रस्ट में शामिल करने के साथ ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ का गठन ही पूरा नहीं हो गया है बल्कि संतों की संतुष्टि के साथ विहिप का उत्साह भी बढ़ गया है। उत्साह की वजह महंत नृत्यगोपाल दास और चंपतराय के प्रमुख भूमिका में आने से विहिप के लिए संतों व हिंदू समाज के बीच से उठ रहे सवालों का जवाब देना आसान हो गया है।
ट्रस्ट की पहली बैठक में ही इसका असर दिखा भी जब थोड़े से बदलाव के साथ पूर्व निर्धारित मॉडल के आधार पर ही मंदिर निर्माण की योजना को परवान चढ़ाने का फैसला किया गया।
दरअसल, ट्रस्ट के गठन के बाद विहिप और संतों के बीच मंदिर के स्वरूप को लेकर ही ऊहापोह थी। भले ही सरकार की तरफ से विहिप और संतों की राय से तय हुए मंदिर के मॉडल में कोई छेड़छाड़ न होने का आश्वासन दिया गया था लेकिन विहिप और प्रमुख संतों के लिए इस पर आम लोगों व संतों को विश्वास दिलाना मुश्किल हो रहा था।
इस बीच, विहिप ने मंदिर निर्माण के लिए 90 के दशक से तैयार की जा रही शिलाओं की सफाई को अब युद्धस्तर पर शुरू करने का फैसला किया है। विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा कहते भी हैं कि शिलाओं की सफाई तेज करने का फैसला किया गया है। सफाई के लिए एक प्रेशर मशीन मंगा ली गई है। कुछ और मंगाई जा रही हैं।
राजस्थान में मंदिर के लिए तैयार किए गए मकराना पत्थरों से तैयार की गई चौखट और गर्भगृह के अन्य कुछ हिस्से पहले ही अयोध्या आ चुके हैं। मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों की संख्या के बारे में वह कहते हैं कि यह सब ट्रस्ट तय करेगा। पर, इतनी शिलाएं जरूर तैयार हो चुकी हैं कि मंदिर निर्माण का काम रुकने नहीं पाएगा।