सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक।
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उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक एक्स पर लिखते हैं कि अखिलेश यादव डीएनए के सवाल पर बहुत भड़के हुए हैं। मैने ये क्या कह दिया कि समाजवादी पार्टी के डीएनए में खराबी है, आप आपे से उसी तरह बाहर हो गए जैसे दस साल पहले यूपी की सत्ता से बाहर हो गए थे। आप इस बात को समझिए कि डीएनए में खराबी से हमारा मतलब किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि आपकी पार्टी की राजनीतिक सोच से है। डीएनए में खराबी का मतलब ये है कि आपकी पार्टी की राजनीति की बुनियाद ही जातिवाद और तुष्टीकरण पर टिकी रही है और आज भी टिकी हुई है। समाजवादी पार्टी ने कभी सबका साथ-सबका विकास की बात की ही नहीं। आपकी प्राथमिकता ही हमेशा वोटबैंक की राजनीति रही है, नीतियों और आदर्शों से आपका दूर दूर तक का लेना देना नहीं रहा है।
पाठक लिखते हैं कि मुस्लिम तुष्टिकरण ही सपा की राजनीति का केंद्रीय हिस्सा रहा है। बतौर मुख्यमंत्री अपने दस्तखत से आतंकियों से जुड़े 14 केस एक साथ वापस लिए। सपा सत्ता के लिए समाज को बांटने में यकीन रखती है। एक-एक आम व्यक्ति की जुबां से आपकी पार्टी के इस डीएनए का जिक्र फूटेगा। किस किस को गालियां देते फिरेंगे आप? सो अपना चेहरा साफ कीजिए, आईने से मत झगड़िये।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि ब्रजेश पाठक के खिलाफ प्रयोग की गई अभद्र और अमर्यादित भाषा समाजवादी पार्टी की कुंठित मानसिकता को दिखाता है, जो बेहद ही निंदनीय और अक्षम्य है। प्रदेश की जनता समाजवादी पार्टी को निरंतर जवाब दे रही है और आगे भी देती रहेगी।
पतन की हद पार कर गई सपा-स्वतंत्र देव सिंह
जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह कहते हैं कि मर्यादा की एक रेखा होती है। गिरने की भी एक हद और पतन की भी एक सीमा होती है। लेकिन, जब कोई राजनैतिक दल समाज की इन वर्जनाओं के पतन की हद को भी पार कर जाता है तो वह विषाक्त हो जाता है। समाजवादी पार्टी अब अधिकृत रूप से उसी स्थिति को प्राप्त हो चुकी है।