प्रदेश सरकार ने राजनीतिक जुलूस, अवैध प्रदर्शन, हड़ताल व बंद जैसे आंदोलनों में सरकारी व निजी संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए जिस संपत्ति क्षति दावा अधिकरण का गठन किया है, उसका अध्यक्ष रिटायर्ड जिला जज होगा। इस अधिकरण के निर्णय के खिलाफ किसी अन्य न्यायालय में अपील नहीं की जा सकेगी।
अधिकरण को आरोपी की संपत्ति अटैच करने का अधिकार होगा। वह अधिकारियों को आरोपी का नाम, पता, फोटोग्राफ इस चेतावनी के साथ प्रचारित-प्रसारित करने का आदेश दे सकेगा कि आम लोग उसकी संपत्ति न खरीदें।
प्रदेश सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन में हिंसा फैलाने व संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति के लिए गत मार्च में यूपी रिकवरी फॉर डैमेज टू पब्लिक एंड प्राइवेट प्रॉपर्टी अध्यादेश-2020 में इस तरह के कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए थे।
इसके तहत अधिकरण में चेयरमैन के अलावा एक सदस्य सहायक आयुक्त स्तर का अधिकारी होगा। अधिकरण संपत्ति के नुकसान के आकलन के लिए दावा कमिश्नर की तैनाती कर सकेगा। जिसकी मदद के लिए प्रत्येक जिले में एक-एक सर्वेयर भी नियुक्त हो सकता है। यह नुकसान के आकलन में तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में कमिश्नर की मदद करेगा। अधिकरण को दीवानी न्यायालय का पूरा अधिकार होगा और यह भू-राजस्व की तरह क्लेम वसूली का आदेश दे सकेगा।
तीन माह में करना होगा दावा व मुआवजा के लिए आवेदन
अधिकरण के समक्ष नुकसान के दावे व मुआवजे के लिए तीन महीने के भीतर 25 रुपये की कोर्ट फीस के साथ आवेदन करना होगा। अन्य सभी आवेदन में 50 रुपये की कोर्ट फीस व 100 रुपये प्रॉसेस फीस भी देनी होगी। संतोषजनक कारण होने पर अधिकरण आवेदन के लिए 30 दिन की अवधि बढ़ा सकेगा।
अधिकरण प्रतिवादी (आरोपी) को क्लेम अप्लीकेशन एक नोटिस के साथ भेजेगा और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत पर दावे की सुनवाई करेगा। यदि आरोपी उपस्थित नहीं होता है तो वह एक पक्षीय ऑर्डर भी कर सकेगा।
अधिकरण नुकसान का दोगुना से अधिक राशि मुआवजा नहीं तय करेगा, लेकिन मुआवजा संपत्ति के बाजार मूल्य से कम भी नहीं होगा। अधिकरण में आए मामले को किसी आपराधिक वाद के अन्य अदालत में विचार होने के आधार पर नहीं रोका जा सकेगा।
दावा अधिकरण का काम
अध्यादेश में हड़ताल, बंद, दंगा, सार्वजनिक हंगामा, विरोध या इस संबंध में सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान की रोकथाम, संपत्ति के संबंध में कुछ कृत्यों की सजा, जुर्माना, संपत्ति के दावों को लागू करने, न्यायाधिकरण को नुकसान की जांच और वहां से संबंधित मुआवजा देने का प्रावधान है।