छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक की कमीशनखोरी के मामले में एसटीएफ ने ऐसी एजेंसियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जिसने विनय पाठक के समय में आगरा विश्वविद्यालय में किसी तरह का काम कराया। एसटीएफ आगरा विश्वविद्यालय में काम कर चुकी कंपनियों की पत्रावली खंगाल रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रोफेसर पाठक ने अन्य कंपनियों से कितने प्रतिशत कमीशन लिया।
सूत्रों की मानें तो विनय पाठक द्वारा 15 प्रतिशत से कम कमीशन नहीं लिया जाता था। जो कंपनी कमीशन की रकम देने से मना करती थीं या कम देती थीं, उन्हें आगे से काम नहीं दिया जाता था। विनय पाठक के खिलाफ पहली एफआईआर डेविड मारियो डेनिस ने दर्ज कराई थी। अब ऐसे ‘डेविड’ की तलाश की जा रही है जिन्होंने भारी कमीशन देकर विनय पाठक के दौर में काम किया। सूत्रों का कहना है कि ऐसी कई कंपनियों की डिटेल एसटीएफ के पास पहुंच भी गई है, जिसके द्वारा कराए गए कार्यों की पड़ताल की जा रही है।
वहीं सूत्रों का कहना है कि एसटीएफ की अलग अलग टीमें प्रोफेसर पाठक की लोकेशन तलाश रही हैं। एसटीएफ द्वारा भेजे गए मेल का अब तक जवाब नहीं दिया। एसटीएफ ने मेल कर उनके मोबाइल नंबर, तीमारदार के नंबर और लोकेशन की जानकारी मांगी थी। एसटीएफ ने प्रोफेसर पाठक को 18 नवंबर को हाजिर होने का कहा था। यह डेडलाइन बीत चुकी है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि पाठक की गिरफ्तारी भी एसटीएफ द्वारा की जा सकती है।