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...तो सपा घिर सकती है इन चुनावी सवालों से

Wed, 04 Sep 2013 07:33 AM IST
टीम डिजिटल
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साढ़े पांच महीने बाद होने जा रहा विधानमंडल सत्र कई मामलों में पिछले सत्र से अलग और महत्वपूर्ण होगा।
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राजनीतिक दलों खासतौर से सपा, बसपा और कांग्रेस का रुख व इन पार्टियों के परस्पर रिश्तों के भविष्य का भी पता चलेगा। इससे यह संकेत भी मिलेगा कि लोकसभा चुनाव कब तक होंगे।

सत्र में सपा सरकार को कई सवालों का सामना करना पड़ सकता है। यह बात भी साफ हो जाएगी कि लोकसभा चुनाव में सीटों का आंकड़ा बढ़ाने के लिए किस दल ने कैसी तैयारी की है।
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मसलन, भाजपा ने यूपी में सपा और केंद्र में कांग्रेस सरकार को घेरने के लिए किन मुद्दों के साथ जनता के बीच जाने का फैसला किया है तो बसपा ने यूपी में अपनी सीटें बढ़ाने के लिए किस तरह की रणनीति बनाई है।

कांग्रेस ने विरोधियों के आक्रमण को बेकार करने के लिए कैसी रणनीति तैयार की है तो लगभग 16 महीने की अखिलेश सरकार ने विरोधियों के हमले से निपटने को क्या-क्या तैयारी की है।
सूबे में सपा, बसपा और कांग्रेस भले ही अलग-अलग पाले में खड़े दिख रहे हों लेकिन दिल्ली में ये तीनों एक ही पाले में हैं। इसका कुछ न कुछ असर यूपी में भी दिखता है। विधानसभा के भीतर भी कई ऐसे मौके देखे गए जब कांग्रेस की तरफ से सपा पर उस सीमा तक ही हमले हुए जितने में विरोधी दल की भूमिका का निर्वाह हो जाए।

बात जब केंद्रीय योजनाओं से यूपी को पूरा पैसा न मिलने की आई तो सपा की तरफ से भी विरोध की सीमा का ख्याल रखने की चिंता दिखाई दी।
एक-दूसरे पर हमले की कोशिश अब जब आम चुनाव नजदीक आ गए हैं तो बसपा, भाजपा व कांग्रेस सभी पूरी ताकत से सरकार पर हमला बोलने की कोशिश करेंगे। जवाब में सपा भी कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी के साथ सदन में आएगी।

सभी की कोशिश होगी कि चुनाव में जिनसे मैदान में मुख्य मुकाबला होना है, उन्हें सदन में ही चारो खाने चित कर लिया जाए। कौन जीतेगा और कौन हारेगा, यह तो बाद में पता चलेगा लेकिन इस बार सदन में पहले से ज्यादा हंगामा होने के आसार हैं।
इन मुद्दों पर हो सकती है घेरने की कोशिश मार्च में पिछला सत्र समाप्त होने के बाद सूबे में कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं जो इस बार सदन में मुख्य रूप से उठ सकती हैं। विपक्ष अपनी सुविधा व नीतियों के लिहाज से इन्हें उठाकर सदन में सरकार को घेरेगा।

इस बार सत्र में कानून-व्यवस्था व विकास कार्यों के अलावा सबसे प्रमुख मुद्दा आईएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल का रहने की उम्मीद है।

विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर सकता है तो एनआरएचएम घोटाले के आरोपों में जेल में बंद बाबू सिंह कुशवाहा के परिवार को सपा में शामिल करने को कांग्रेस मुद्दा बना सकती है।

सपा विधायक झीन बाबू की गोवा में गिरफ्तारी और औरैया में रामबाबू यादव के प्रकरण पर बसपा, भाजपा और कांग्रेस तीनों की तरफ से सरकार की घेराबंदी हो सकती है।
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सरकारी योजनाओं में अल्पसंख्यकों को आरक्षण देने के फैसले पर भाजपा की तरफ से अखिलेश सरकार को घेरा जा सकता है।

भाजपा के पास इस सत्र में मेरठ, मुजफ्फरनगर व लखनऊ सहित ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर वह सरकार पर तुष्टीकरण के आरोप को और मजबूती के साथ लगाने व उसे घेरने की कोशिश करेगी। विपक्ष की तरफ से विकास योजनाओं का पूरा पैसा खर्च न हो पाने का मुद्दा भी उठ सकता है।
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