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'दंगाराज और जंगलराज...यही है सपा राज'

Mon, 16 Sep 2013 01:19 PM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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जैसी की आशंका जताई जा रही थी, सोमवार से शुरू हुए विधानमंडल सत्र शुरू होते ही हंगामा शुरू हो गया। बसपा के विधायकों ने बैनर-पोस्टर लहराने शुरू कर दिए।
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इसमें भाजपा और रालोद के सदस्य भी शामिल हो गए। बसपा ने 'दंगाराज और जंगलराज...यही है सपा राज' जैसे नारे लगाकर प्रदेश सरकार को निकम्मा और सांप्रदायिक बताया।

आखिरकार मुजफ्फरनगर दंगे पर विपक्ष के विरोध के चलते यूपी विधानसभा की कार्यवाही 18 सितंबर तक स्थगित कर दी गई है।

बसपा और रालोद के बाद कांग्रेस और भाजपा ने भी सरकार को घेर लिया और सदन में जमकर नारेबाजी की। इसके चलते सदन में कोई भी कामकाज नहीं किया जा सका और विधानसभा स्थगित कर दी गई।
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गौरतलब है कि यूं तो हर सत्र में सरकार के कामकाज और भूमिका कसौटी पर होती है, पर इस विधानमंडल सत्र के दौरान कई मुद्दे सरकार के लिए सदन में मुसीबत बनेंगे।

इनमें मुजफ्फरनगर दंगे से लेकर आईएएस दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबन, सपा विधायक झीन बाबू की गोवा यात्रा और कानून-व्यवस्था के सवाल शामिल हैं।

सत्र की पूर्व संध्या पर विपक्षी दलों के तेवरों ने भी साफ कर दिया है कि वे सरकार को घेरने का मौका नहीं छोड़ेंगे। सोमवार को पहले दिन सरकार पर विपक्ष के हमले का मुख्य हथियार मुजफ्फरनगर दंगा ही होगा।

जाहिर है ऐसे में सत्र हंगामेदार होगा। लगभग साढ़े पांच महीने बाद होने जा रहा विधानमंडल सत्र संक्षिप्त रहने के आसार हैं।

विधानसभाध्यक्ष व विधानपरिषद कार्यमंत्रणा समितियों ने सदन का चार दिन का समय निर्धारित किया है, पर सूत्रों का कहना है कि सत्र के इससे भी कम दिन चलने की संभावना है।

इन साढ़े पांच महीनों में प्रदेश में कई ऐसी घटनाएं घट चुकी हैं, जिनको लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। इनमें सबसे प्रमुख मुजफ्फरनगर दंगा है।

विपक्ष इस मुद्दे को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। भाजपा ने इस मुद्दे पर न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि सरकार की पक्षपातपूर्ण भूमिका को भी मुद्दा बनाने की तैयारी की है।

बसपा, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल ने भी साफ कर दिया है कि मुजफ्फरनगर दंगे पर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

सांप्रदायिक तनाव से लेकर कानून-व्यवस्था तक
सिर्फ मुजफ्फरनगर ही नहीं, सूबे के कई शहर सांप्रदायिक तनाव का सामना कर चुके हैं। इनमें राजधानी लखनऊ भी शामिल है। मुजफ्फरनगर के आसपास शामली, बागपत सहित कई नगरों में यह स्थिति सामने आ चुकी है।

कानून-व्यवस्था की बात करें तो पिछले कुछ दिनों से दूसरी जगह की कौन कहे, खुद सपा नेताओं के घर के इर्द-गिर्द इटावा-मैनपुरी की पट्टी में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े करने वाली घटनाएं घट चुकी हैं। अपहरण, लूट, हत्याएं, पुलिस पर हमले मुद्दा तो हैं ही।

इसी के साथ समाजवादी पार्टी से ही जुड़े एक जिला पंचायत सदस्य की हत्या ने भी सरकार के कानून-व्यवस्था के दावे को कठघरे में खड़ा कर दिया है। राजधानी से सटे पड़ोसी जिले बाराबंकी में खनन माफिया द्वारा हाल ही की गई हत्या का मामला भी सदन में गूंज सकता है।

दुर्गाशक्ति नागपाल
बाराबंकी की घटना के जरिये विपक्ष आईएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर सकता है।

कारण, जब नागपाल को निलंबित किया गया था तो सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने कहा था कि नागपाल का निलंबन खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई के कारण नहीं बल्कि एक धार्मिक स्थल की दीवार को मनमाने तरीके से गिरवाने के कारण किया गया है।

झीन बाबू की गोवा यात्रा
सपा विधायक झीन बाबू की गोवा यात्रा के भी सदन में छाए रहने के आसार हैं। साथ ही इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ दल के विधायकों व नेताओं द्वारा जगह-जगह की जा रही दबंगई को भी विपक्ष सरकार के खिलाफ हमले का जरिया बना सकता है।
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इसके अलावा बिजली-पानी व बाढ़ के संकट, विकास योजनाओं में सुस्ती, जिला योजनाओं के पैसे का आवंटन न होने के मुद्दे पर भी विपक्ष के आरोपों का सरकार को जवाब देना होगा।
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