इसके बाद वह अक्सर उसके घर आने-जाने लगा। पीड़िता का बेटा भी सैजी को अपना पिता कहने लगा। इस दौरान पीड़िता लगातार सैजी से शादी के लिए कहती रही। करीब आठ महीने बाद सैजी अपने साथ मौलवी और परिवार की बुर्कानशीं महिलाओं को लेकर उसके घर आया तब उसका राज खुला।
पीड़िता ने निकाह के लिए मना कर दिया। इस पर उसके परिवार की महिलाओं ने बदनामी कराने की धमकी दी। मजबूरी का फायदा उठाकर उसने निकाह पढ़वा लिया। हालांकि, निकाहनामे में दस्तखत नहीं किए। इसके बाद सैजी उससे पति की तरह संबंध बनाता रहा। इसके बाद जरा-जरा सी बात पर वह उसकी आए दिन बेरहमी से पिटाई करने लगा।
पीड़िता का कहना है कि वह दो बार गर्भवती हुई और दोनों बार सैजी ने गर्भपात करा दिया। गर्भपात के वक्त उसकी बहनें कई दिन तक घर में साथ रहती थीं। दो महीने पहले उसने सैजी की मां को फोन किया तो उन्होंने दूसरी महिला से उसके निकाह की बात कहते हुए दोबारा कॉल न करने की चेतावनी दी। तब पीड़िता ने पुलिस से संपर्क कर सैजी अब्बास, उसके पिता मो. अशफाक, बहन बज्जो, शैला व अंशू और सैजी के बहनोई के खिलाफ एफआईआर कराई।
सलाम सुनकर होता था शक
पीड़िता का कहना है कि वह जब भी सैजी उर्फ अर्जुन उर्फ मनोज से फोन पर बात करती थी तो पीछे से कोई न कोई सलाम कहता था। इस पर वह चौंक जाती थी। सैजी से पूछती कि सलाम क्यों बोल रहा है। क्या तुम मुसलमान हो। इस पर सैजी साफ मना कर देता था। वह कहता था कि टेंट हाउस के ऑफिस में हर तरह के लोग आते-जाते हैं। कोई पीछे से क्या बोल रहा है? इस पर ध्यान न दिया करो।